उत्तर प्रदेश आवास विकास परिषद में ठेकों के आवंटन को लेकर गंभीर आरोप सामने आए हैं। आरोप है कि कुछ निर्माण कंपनियों को कथित तौर पर फर्जी दस्तावेजों और बैंक सॉल्वेंसी के आधार पर करोड़ों रुपये के ठेके दिए गए हैं। मामले को लेकर विभागीय अधिकारियों और ठेकेदारों की भूमिका पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं।
फर्जी दस्तावेजों के आधार पर ठेके मिलने का आरोप
शिकायतों में दावा किया गया है कि कुछ परियोजनाओं में कथित तौर पर फर्जी बैंक सॉल्वेंसी और अन्य दस्तावेजों का उपयोग कर टेंडर हासिल किए गए। आरोपों के केंद्र में शक्ति कंस्ट्रक्शन और उससे जुड़े लोगों का नाम सामने आया है। कहा जा रहा है कि कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं में इसी कंपनी को काम आवंटित किया गया।
एसटीपी परियोजनाओं पर भी सवाल
जानकारी के अनुसार बहराइच, भिनगा, लखनऊ के वृंदावन सेक्टर-20बी और अनौरा क्षेत्र में सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) परियोजनाओं के ठेकों को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। आरोप है कि इन परियोजनाओं में प्रस्तुत दस्तावेजों की वैधता को लेकर गंभीर आपत्तियां दर्ज कराई गई हैं।
अधिकारियों की भूमिका पर भी उठे सवाल
मामले में कुछ वरिष्ठ अधिकारियों पर भी आरोप लगाए गए हैं। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि बार-बार शिकायतें किए जाने के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई सामने नहीं आई है। आरोप है कि संबंधित अधिकारियों की कथित मेहरबानी के चलते मामले की जांच आगे नहीं बढ़ पा रही है।
संयुक्त उपक्रम के दस्तावेजों पर विवाद
शिकायत में यह भी दावा किया गया है कि एक संयुक्त उपक्रम (JV) के तहत प्रस्तुत कुछ प्रमाणपत्रों की सत्यता पर सवाल हैं। आरोप है कि संबंधित दस्तावेजों के आधार पर टेंडर प्रक्रिया में लाभ प्राप्त किया गया। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
शिकायतों के बावजूद कार्रवाई का इंतजार
मामले की शिकायत आवास विकास परिषद के उच्च अधिकारियों और अन्य संबंधित स्तरों पर किए जाने का दावा किया गया है। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि कई महीने बीत जाने के बाद भी मामले में कोई स्पष्ट परिणाम सामने नहीं आया है। फिलहाल यह सभी आरोप शिकायतों और दावों पर आधारित हैं। मामले में आधिकारिक जांच और संबंधित पक्षों के जवाब के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।














