ईरान और अमेरिका के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ता नजर आ रहा है। ईरान ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सैन्य कार्रवाई से जुड़े बयानों पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने अमेरिका को वैश्विक परमाणु अप्रसार व्यवस्था (न्यूक्लियर नॉन-प्रोलिफरेशन सिस्टम) के लिए सबसे बड़ा खतरा बताया है। उनका यह बयान ईरान की बची हुई परमाणु सुविधाओं को निशाना बनाने की अमेरिकी धमकियों के संदर्भ में आया है।
अमेरिका पर ईरान का तीखा हमला
सोमवार को प्रेस ब्रीफिंग के दौरान इस्माइल बघाई ने कहा कि अमेरिका की ओर से किसी देश को परमाणु हथियारों के इस्तेमाल की धमकी देना परमाणु अप्रसार संधि (NPT) की भावना के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि इस तरह की धमकियां अंतरराष्ट्रीय परमाणु व्यवस्था को कमजोर करती हैं।
बघाई ने संयुक्त राष्ट्र, सुरक्षा परिषद और अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) जैसी संस्थाओं की चुप्पी पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि अमेरिका खतरनाक अंतरराष्ट्रीय मिसाल कायम कर रहा है। साथ ही कहा कि ईरान के खिलाफ लगातार मिल रही धमकियां उसे अपनी रक्षा क्षमताओं को मजबूत करने के लिए और दृढ़ बनाएंगी।
परमाणु कार्यक्रम को लेकर ईरान ने क्या कहा?
ईरानी प्रवक्ता ने दोहराया कि उनका देश परमाणु कार्यक्रम का इस्तेमाल केवल शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए करता रहा है और आगे भी ऐसा ही करेगा। उन्होंने अमेरिका के उन आरोपों को खारिज किया, जिनमें ईरान पर परमाणु हथियार विकसित करने की कोशिश करने का दावा किया जाता है।
बघाई के मुताबिक, ईरान में परमाणु नीति को लेकर सार्वजनिक और राजनीतिक स्तर पर चल रही चर्चाएं अमेरिकी दबाव और परमाणु कार्यक्रम से जुड़े लोगों की लक्षित हत्याओं का स्वाभाविक परिणाम हैं।
उन्होंने स्पष्ट किया कि फिलहाल ईरान परमाणु अप्रसार संधि (NPT) का सदस्य बना हुआ है और संधि के सदस्य रहते हुए उससे जुड़ी जिम्मेदारियों का पालन करने के लिए प्रतिबद्ध है।
IAEA पर भी ईरान ने उठाए सवाल
ईरान ने अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के महानिदेशक राफेल ग्रॉसी की ओर से परमाणु ठिकानों के नए निरीक्षण की मांग पर भी नाराजगी जताई है।
बघाई ने कहा कि ईरान फिलहाल नए निरीक्षण के चरण में नहीं पहुंचा है। उन्होंने आरोप लगाया कि IAEA ने ईरानी परमाणु सुविधाओं पर अमेरिका और इजरायल के हमलों की निंदा नहीं की। उनके मुताबिक, एजेंसी के इस रवैये से उसकी अंतरराष्ट्रीय विश्वसनीयता को नुकसान पहुंचा है।
ईरान ने संकेत दिया है कि भविष्य में परमाणु कार्यक्रम को लेकर किसी भी तरह की बातचीत तभी आगे बढ़ेगी, जब वॉशिंगटन मध्यस्थता के जरिए उसकी शुरुआती मांगों को पूरा करेगा।
ट्रंप ने सैन्य कार्रवाई को बताया जरूरी
इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के खिलाफ अमेरिकी सैन्य कार्रवाई का बचाव किया है। आयोवा में एक चुनावी रैली को संबोधित करते हुए ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिका ने ईरान को परमाणु हथियार बनाने से रोकने के लिए सैन्य कार्रवाई की थी।
ट्रंप ने कहा कि उन्होंने ईरान को परमाणु हथियार विकसित करने से रोकने के लिए मध्य पूर्व में सैन्य हस्तक्षेप का फैसला लिया। उन्होंने यह भी दावा किया कि अमेरिकी सैन्य अभियान ने ईरान की सैन्य क्षमताओं को काफी कमजोर कर दिया है।
तेल की बढ़ती कीमतों पर ट्रंप का बयान
ईरान के साथ संघर्ष के चलते तेल की कीमतों में हो रही बढ़ोतरी को लेकर उठ रही चिंताओं पर भी ट्रंप ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि अमेरिका और दुनिया की सुरक्षा के लिहाज से आर्थिक नुकसान बहुत छोटी कीमत है।
ट्रंप का यह बयान ऐसे समय आया है, जब 3 नवंबर को होने वाले अमेरिकी मिडटर्म चुनावों से पहले ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान को लेकर वॉशिंगटन और तेल अवीव के बीच नए सिरे से चर्चा की खबरें सामने आ रही हैं। ऐसे में ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ता तनाव अंतरराष्ट्रीय राजनीति और वैश्विक ऊर्जा बाजार के लिए अहम मुद्दा बना हुआ है।














