वाशिंगटन/जेनेवा: वैश्विक राजनीति और मिडल ईस्ट (Middle East) की सुरक्षा के लिहाज से एक बेहद चौंकाने वाली और ऐतिहासिक खबर सामने आ रही है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि संयुक्त राज्य अमेरिका और ईरान के बीच एक ऐतिहासिक शांति समझौते (Peace Deal) पर सहमति बन गई है। ट्रंप के अनुसार, दोनों देशों के बीच युद्ध और सैन्य अभियानों को स्थायी रूप से समाप्त करने के लिए दस्तावेजों पर डिजिटल रूप से हस्ताक्षर (Digitally Signed) भी किए जा चुके हैं। अब इस ऐतिहासिक शांति समझौते पर औपचारिक मुहर लगाने के लिए स्विट्जरलैंड के जेनेवा में एक विशेष हस्ताक्षर समारोह (Signing Ceremony) आयोजित किया जाएगा।

इस बड़े कूटनीतिक घटनाक्रम की मध्यस्थता पाकिस्तान और कतर जैसे देशों ने की है। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस (JD Vance) ने पुष्टि की है कि वे खुद जेनेवा जाकर इस हस्ताक्षर समारोह में शामिल होंगे। वहीं राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी संकेत दिए हैं कि जी-7 शिखर सम्मेलन (G7 Summit) के शेड्यूल को देखते हुए वे खुद भी जेनेवा का रुख कर सकते हैं। उपराष्ट्रपति वेंस के मुताबिक, समझौते का पूरा मसौदा (Text) जल्द ही सार्वजनिक किया जाएगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इस ऐतिहासिक समझौते के बदले ईरान को तत्काल कोई सीधा कैश या पैसा जारी नहीं किया गया है।

हालांकि, ईरान को 300 अरब डॉलर के पुनर्निर्माण पैकेज या मुआवजे दिए जाने को लेकर पर्दे के पीछे चर्चा जरूर चल रही है, लेकिन अमेरिकी प्रशासन इसे सीधे तौर पर ‘डायरेक्ट कैश पेमेंट’ नहीं मान रहा है। अमेरिकी पक्ष का साफ कहना है कि ईरान को कोई भी आर्थिक लाभ या प्रतिबंधों में ढील तभी मिलेगी, जब वह परमाणु दायित्वों (Nuclear Obligations) और अंतरराष्ट्रीय सत्यापन की शर्तों को पूरी तरह से पूरा करेगा। इस ऐतिहासिक समझौते का सबसे बड़ा और तत्काल असर ‘स्ट्रैट ऑफ हॉर्मुज’ (Strait of Hormuz) पर दिखने जा रहा है। राष्ट्रपति ट्रंप ने दावा किया है कि इस शुक्रवार तक हॉर्मुज जलडमरूमध्य को पूरी तरह से व्यापार के लिए खोल दिया जाएगा और अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी हटा ली जाएगी, जिससे वैश्विक तेल बाजार और अंतरराष्ट्रीय व्यापार को बहुत बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।

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