नई दिल्ली। ज़ी टीवी और एस्सेल ग्रुप के चेयरमैन सुभाष चंद्रा की मुश्किलें अब और बढ़ गई हैं। केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने उनके और अन्य लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी का बड़ा मामला दर्ज किया है। आरोप है कि उन्होंने 2018 से 2026 के बीच एलआईसी हाउसिंग फाइनेंस लिमिटेड (LICHFL) के साथ करीब 1,322 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी की।

कंपनी ने दी थीं दो बड़ी लोन सुविधाएं

LICHFL की शिकायत के मुताबिक, सुभाष चंद्रा को दो बड़ी लोन फैसिलिटी दी गई थीं। पहली ‘वसंत सागर लोन फैसिलिटी’ के तहत वसंत सागर प्रॉपर्टीज और पैन इंडिया इंफ्राप्रोजेक्ट्स को 500 करोड़ रुपये का होम एंटिटी लोन दिया गया, जिसकी गारंटी 28 मार्च 2018 को सुभाष चंद्रा ने खुद दी थी। दूसरी ‘डिजिटल लोन फैसिलिटी’ के तहत डिजिटल सब्सक्राइबर मैनेजमेंट और स्पिरिट इंफ्रापावर को 480 करोड़ रुपये की रेंटल डिस्काउंटिंग सुविधा मिली, जिसकी गारंटी भी 10 अगस्त 2018 को सुभाष चंद्रा ने ही दी थी।

नेटवर्थ सर्टिफिकेट में हुआ हजारों करोड़ का खेल

शिकायत में सबसे गंभीर आरोप यह है कि ये दोनों लोन फर्जी नेटवर्थ सर्टिफिकेट के आधार पर मंजूर किए गए। वसंत सागर लोन के लिए पेश सर्टिफिकेट में सुभाष चंद्रा की कुल संपत्ति 6,197.62 मिलियन डॉलर यानी करीब 59,113 करोड़ रुपये दिखाई गई थी। वहीं, डिजिटल लोन के लिए छह जुलाई 2018 को एमपीजे एंड कंपनी चार्टर्ड अकाउंटेंट्स की ओर से जारी प्रमाणपत्र में नेटवर्थ 40,562 करोड़ रुपये बताई गई। लेकिन 2024 में जब मामले की पड़ताल हुई, तो सुभाष चंद्रा की असली घोषित संपत्ति सिर्फ 31.79 करोड़ रुपये निकली। यानी दावे और हकीकत के बीच हजारों करोड़ का अंतर पाया गया।

धोखे से लिया गया लोन

एलआईसी हाउसिंग फाइनेंस का कहना है कि उसने इन्हीं नेटवर्थ प्रमाणपत्रों पर भरोसा करके करोड़ों की लोन सुविधाएं मंजूर कीं, लेकिन बाद में ये पूरी तरह धोखे से भरा मामला साबित हुआ। अब सीबीआई पूरे घोटाले की गहराई से जांच कर रही है और आने वाले दिनों में कई बड़े खुलासे हो सकते हैं।

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