वृंदावन के संत प्रेमानंद महाराज के आश्रम से जुड़े विवाद लगातार चर्चा में हैं। उनके 25 वर्षीय शिष्य रसिक दुलारी शरण की मौत के बाद सीसीटीवी फुटेज सामने आए। इसके बाद मृतक के परिवार ने जांच को लेकर सवाल उठाए। वहीं, कुछ अन्य लोगों के लापता होने के मामले भी सामने आए, जिनके परिजनों ने आश्रम के बाहर पहुंचकर अपने सवाल रखे। इसी बीच विराट कोहली को लेकर भी एक दावा किया गया, जिसे उनकी टीम ने खारिज कर दिया है।
इन तमाम घटनाक्रमों के बीच प्रेमानंद महाराज गुरुवार को एक बार फिर वृंदावन के केली कुंज आश्रम पहुंचे। आइए जानते हैं कि प्रेमानंद महाराज कौन हैं, उनके शिष्य की मौत का मामला क्या है और अब तक इस विवाद में क्या-क्या सामने आया है।
कौन हैं संत प्रेमानंद महाराज?
प्रेमानंद महाराज का जन्म उत्तर प्रदेश के कानपुर जिले के सरसौल ब्लॉक स्थित अखरी गांव में एक धार्मिक ब्राह्मण परिवार में हुआ था। उनका बचपन का नाम अनिरुद्ध कुमार पांडे था। बचपन से ही उनका झुकाव पूजा-पाठ और आध्यात्मिक गतिविधियों की ओर था।
बताया जाता है कि वह पांचवीं कक्षा से अपने पिता के साथ धार्मिक गतिविधियों में शामिल होने लगे थे। उन्होंने आठवीं कक्षा तक पढ़ाई की और इसके बाद आध्यात्मिक जीवन अपनाने का फैसला किया।
वर्तमान में वृंदावन स्थित श्रीहित राधा केली कुंज आश्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालु उनके दर्शन और आध्यात्मिक मार्गदर्शन के लिए पहुंचते हैं। उनके शिष्यों में रसिक दुलारी शरण भी शामिल थे, जिनकी मौत के बाद यह मामला चर्चा में आया।
25 वर्षीय शिष्य रसिक दुलारी शरण की कैसे हुई मौत?
25 सितंबर को प्रेमानंद महाराज के 25 वर्षीय शिष्य रसिक दुलारी शरण की वृंदावन के वराह घाट क्षेत्र स्थित गो कृपा कुंज की चौथी मंजिल से गिरने के बाद मौत हो गई थी। उन्हें तत्काल अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उनका इलाज किया। हालांकि, करीब दो घंटे तक उपचार के बावजूद उन्हें बचाया नहीं जा सका।
अस्पताल के रिकॉर्ड के अनुसार, वह सुबह 11:10 बजे अस्पताल पहुंचे थे। उनके शरीर पर गंभीर चोटें थीं और डॉक्टरों ने घावों पर टांके भी लगाए थे। 26 सितंबर को यमुना किनारे उनका अंतिम संस्कार किया गया।
घटना के बाद मौत की परिस्थितियों को लेकर सवाल उठने लगे। मृतक के परिवार ने भी मामले की गहन जांच की मांग की।
शिष्य की मौत के बाद क्यों वायरल हुए चार CCTV फुटेज?
रसिक दुलारी शरण की मौत के बाद घटना से जुड़े चार सीसीटीवी फुटेज सोशल मीडिया पर वायरल होने की बात सामने आई। इनमें एक फुटेज में वह गो कृपा कुंज के कमरे से बाहर निकलते दिखाई देते हैं।
वीडियो में उन्होंने सफेद हाफ कुर्ता और पीली धोती पहनी हुई है। वह अपनी धोती संभालते हुए गैलरी की ओर बढ़ते हैं और फिर सीढ़ियों की तरफ मुड़ जाते हैं। फुटेज में उनकी चाल सामान्य नहीं दिखाई देने का दावा किया जा रहा है।
इन वीडियो के सामने आने के बाद सवाल उठे कि घटना से पहले क्या हुआ था और फुटेज सोशल मीडिया तक कैसे पहुंचे। पुलिस इन पहलुओं की जांच कर रही है। हालांकि, केवल वीडियो के आधार पर मौत की वजह या उससे पहले की घटनाओं के बारे में कोई अंतिम निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता।
कमरे से ग्राइंडर मिलने और चोटों को लेकर उठे सवाल
मामले में पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट और कमरे से मिले सामान को लेकर भी सवाल उठे हैं। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में रसिक दुलारी के प्राइवेट पार्ट पर चोट के निशान का उल्लेख किया गया है। वहीं, उनके कमरे से ग्राइंडर मिलने की बात भी सामने आई।
पुलिस मोबाइल फोन और अन्य डिजिटल साक्ष्यों की जांच कर रही है। यह भी पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि फोन से कोई चैट या वीडियो डिलीट किया गया था या नहीं।
फिलहाल मौत से पहले की घटनाओं और इन परिस्थितियों के बीच किसी संबंध की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। मामले की जांच जारी है।
परिवार ने लगाए सवाल, उच्चस्तरीय जांच की मांग
रसिक दुलारी शरण मूल रूप से मध्य प्रदेश के जबलपुर के रहने वाले थे। उनका मूल नाम दीपक लोधी था। करीब दो साल पहले वह वृंदावन आए थे और प्रेमानंद महाराज से दीक्षा लेने के बाद उनका नाम रसिक दुलारी शरण हो गया था।
परिवार के मुताबिक, उन्हें बिजली का काम आता था और आश्रम में वह इसी से जुड़ी सेवा करते थे। वह दो भाइयों और एक बहन में दूसरे नंबर पर थे।
उनकी मां लौंग बाई ने बताया कि उन्होंने करीब दो साल पहले बेटे से आखिरी बार बात की थी। बेटे के गिरने की सूचना मिलने के बाद परिवार वृंदावन पहुंचा था। परिवार का कहना है कि इससे पहले भी वे बेटे से मिलने आए थे, लेकिन मुलाकात नहीं हो सकी थी।
परिजनों ने मामले की जांच को लेकर सवाल उठाए और उच्चस्तरीय जांच की मांग की है।
पुलिस अब तक 50 से ज्यादा लोगों से कर चुकी है पूछताछ
रसिक दुलारी की मौत के मामले में पुलिस 50 से ज्यादा लोगों से पूछताछ कर चुकी है। जांच में सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल फोन और अन्य डिजिटल व भौतिक साक्ष्यों की पड़ताल की जा रही है।
पुलिस के अनुसार, मामले से जुड़े डिजिटल साक्ष्य सुरक्षित हैं और डीवीआर पुलिस की अभिरक्षा में है। इसके बावजूद फुटेज सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद उनके स्रोत का पता लगाने की कोशिश की जा रही है।
उत्तर प्रदेश अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति आयोग ने भी मामले का संज्ञान लिया है।
इलाहाबाद हाईकोर्ट तक पहुंचा मामला
रसिक दुलारी की मौत की जांच को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को पत्र याचिका भेजे जाने की जानकारी भी सामने आई है। अधिवक्ता प्रहलाद कृष्ण शुक्ला ने मामले की हाईकोर्ट की निगरानी में विशेष जांच दल (SIT) से जांच कराने की मांग की है।
वैकल्पिक तौर पर मजिस्ट्रियल जांच कराने और मामले से जुड़े सभी साक्ष्यों को सुरक्षित रखने की मांग भी की गई है। इन मांगों के संबंध में आगे की न्यायिक कार्रवाई की स्थिति की आधिकारिक पुष्टि जरूरी है।
आश्रम से जुड़े लापता लोगों के मामले भी आए सामने
रसिक दुलारी की मौत की जांच के बीच आश्रम से जुड़े कुछ लोगों के लापता होने के मामले भी चर्चा में आए। इनमें हाथरस के सादाबाद क्षेत्र के बरमानी गांव के 17 वर्षीय अनुज चौधरी का मामला प्रमुख रहा।
अनुज के पिता राजवीर के मुताबिक, उनके बेटे ने 26 जून को प्रेमानंद महाराज से दीक्षा ली थी। इसके बाद वह घर लौट आया था। 3 जुलाई को वह दोबारा महाराज के दर्शन के लिए आश्रम जाने की बात कहकर निकला, लेकिन वापस नहीं लौटा। परिवार ने 5 जुलाई को सादाबाद थाने में गुमशुदगी दर्ज कराई थी।
परिवार ने आरोप लगाया कि बेटे की तलाश के दौरान उन्हें आश्रम से संतोषजनक जानकारी नहीं मिली। इस मामले में परिवार आश्रम के बाहर धरने पर भी बैठा।
हालांकि, पुलिस की जांच में सामने आया कि अनुज ने आश्रम में दीक्षा ली थी, लेकिन परिसर में उसके ठहरने का रिकॉर्ड नहीं मिला। आश्रम प्रशासन ने जांच में सहयोग करने की बात कही।
दी गई जानकारी के मुताबिक, पुलिस ने बाद में अनुज को मथुरा के बरसाना क्षेत्र स्थित एक आश्रम से बरामद कर लिया। अब उससे यह जानने के लिए पूछताछ की जा रही है कि वह इतने समय तक कहां था और वहां कैसे पहुंचा।
बेटी और बेटे की तलाश में आश्रम पहुंचे दूसरे परिवार
अनुज का मामला सामने आने के बाद कुछ अन्य परिवार भी अपने लापता परिजनों की तलाश में आश्रम पहुंचे।
नोएडा के सेक्टर-65 निवासी उमेश सिंह ने अपनी 35 वर्षीय बेटी विभा की तलाश को लेकर जानकारी दी। परिवार के मुताबिक, विभा एमबीए की पढ़ाई पूरी कर चुकी हैं और 15 अगस्त को प्रेमानंद महाराज के आश्रम जाने की बात कहकर घर से निकली थीं। इसके बाद वह वापस नहीं लौटीं।
एक अन्य मामला अनीता चौधरी से जुड़ा है, जो हरियाणा के नजफगढ़ की रहने वाली बताई गई हैं। जानकारी के मुताबिक, वह आश्रम के पास एक ढाबे पर खाना बनाने का काम करती थीं। उनका कहना था कि वह जरूरी काम से बाहर गई थीं और अपने 10 वर्षीय बेटे को ढाबे पर छोड़ गई थीं। वापस लौटने पर बच्चा वहां नहीं मिला।
इसके अलावा एक अन्य युवक के लापता होने का मामला भी सामने आया, जिसमें परिजन उसकी तस्वीर लेकर आश्रम के बाहर तलाश करते दिखाई दिए। इन शिकायतों के बाद संबंधित परिवारों ने अपने परिजनों का पता लगाने की मांग की।
हालांकि, इन सभी मामलों को एक-दूसरे से जुड़ा हुआ मानने के लिए अभी पर्याप्त आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।
परिजनों और आश्रम समर्थकों के बीच क्यों हुआ विवाद?
3 अक्टूबर को लापता लोगों के कुछ परिजन आश्रम के गेट पर पहुंचे थे। इस दौरान वहां मौजूद कुछ समर्थकों के साथ उनकी कहासुनी होने की बात सामने आई।
महाराष्ट्र से अपने बेटे की तलाश में आई महिला उज्ज्वला के साथ अभद्रता और मारपीट की कोशिश के आरोप लगाए गए। लापता परिजनों के समर्थन में पहुंचीं साध्वी इंदुलेखा के साथ भी खींचतान की जानकारी सामने आई। कुछ मीडियाकर्मियों के साथ धक्का-मुक्की होने की बात भी कही गई।
पुलिस ने हंगामे के मामले में सचिन, अशोक और दिगंबर को पकड़ा और शांतिभंग के तहत कार्रवाई की। घटना को लेकर लगाए गए आरोपों की पुष्टि संबंधित आधिकारिक रिकॉर्ड से की जानी चाहिए।
विराट कोहली का नाम इस विवाद में कैसे आया?
प्रेमानंद महाराज के आश्रम से जुड़े विवाद के बीच श्री कृष्ण जन्मभूमि संघर्ष न्यास के अध्यक्ष दिनेश फलाहारी महाराज ने विराट कोहली को लेकर एक दावा किया।
उन्होंने आरोप लगाया कि जब प्रेमानंद महाराज की लोकप्रियता मौजूदा स्तर पर नहीं थी, तब महाराष्ट्र की एक पीआर कंपनी और राजस्थान के एक प्रॉपर्टी ग्रुप ने उनके संदेश को ज्यादा लोगों तक पहुंचाने के लिए उनसे संपर्क किया था।
फलाहारी महाराज ने दावा किया कि इसी प्रचार अभियान के तहत विराट कोहली को प्रेमानंद महाराज से मिलवाया गया और इस पूरी कवायद पर करीब पांच करोड़ रुपये खर्च किए गए। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि बिल्डर और प्रॉपर्टी से जुड़े लोगों ने आश्रम की लोकप्रियता का इस्तेमाल अपने हितों के लिए किया।
इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए पांच करोड़ रुपये खर्च किए जाने के दावे को स्थापित तथ्य के रूप में नहीं देखा जा सकता।
विराट कोहली की टीम ने पांच करोड़ रुपये के दावे पर क्या कहा?
विराट कोहली को लेकर किए गए दावे के बाद उनकी टीम की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया दी गई। 7 अक्टूबर को सामने आए बयान में विराट कोहली के प्रवक्ता ने पांच करोड़ रुपये दिए जाने के दावे को गलत, निराधार और तथ्यात्मक रूप से गलत बताया।
टीम ने कहा कि विराट कोहली की प्रेमानंद महाराज से मुलाकातें उनकी आस्था और सम्मान से जुड़ी हैं, किसी आर्थिक लेनदेन के कारण नहीं।
इस तरह विराट कोहली की टीम ने प्रचार के लिए पैसे दिए जाने के आरोप को स्पष्ट रूप से खारिज कर दिया है।
विराट कोहली और अनुष्का शर्मा कब मिले थे प्रेमानंद महाराज से?
विराट कोहली और अनुष्का शर्मा 4 जनवरी 2023 को पहली बार वृंदावन पहुंचे थे। इस दौरान दोनों ने प्रेमानंद महाराज से मुलाकात कर उनका आशीर्वाद लिया था।
इसके बाद भी दोनों कई बार आश्रम पहुंचे और उनकी मुलाकातों के वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आते रहे। दी गई जानकारी के मुताबिक, 22 जुलाई 2026 को भी दोनों प्रेमानंद महाराज से मिलने वृंदावन पहुंचे थे।
इन मुलाकातों को लेकर विराट कोहली की टीम ने कहा है कि उनका आधार आस्था और सम्मान है, न कि किसी तरह का आर्थिक लेनदेन।
विवादों के बीच फिर केली कुंज आश्रम पहुंचे प्रेमानंद महाराज
इन सभी घटनाक्रमों के बीच प्रेमानंद महाराज गुरुवार को फिर केली कुंज आश्रम पहुंचे। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, वह सुबह करीब पांच बजे मांट के जहांगीरपुर खादर स्थित यमुना विहार कुंज आश्रम से गाड़ियों के काफिले के साथ केली कुंज पहुंचे।
आश्रम में रुकने के बाद वह वराह घाट स्थित अपने गुरु श्रीहित गोविंद शरण महाराज के आश्रम गए। गुरु के दर्शन करने के बाद वह दोबारा यमुना विहार कुंज आश्रम के लिए रवाना हो गए।
उनके आश्रम पहुंचने पर भक्तों ने ‘श्री हरिवंश’ और ‘राधे-राधे’ का जाप किया।
प्रेमानंद महाराज आश्रम विवाद में अब तक क्या-क्या हुआ?
रसिक दुलारी शरण की मौत के बाद सीसीटीवी फुटेज वायरल हुए और परिवार ने जांच पर सवाल उठाए। इसके बाद पुलिस जांच, उच्चस्तरीय जांच की मांग और कुछ लापता लोगों के मामलों ने विवाद को और व्यापक बना दिया। आश्रम के बाहर परिजनों और समर्थकों के बीच विवाद की खबरें भी सामने आईं।
इसी बीच विराट कोहली को लेकर पांच करोड़ रुपये खर्च किए जाने का दावा किया गया, जिसे उनकी टीम ने खारिज कर दिया। फिलहाल शिष्य की मौत से जुड़े सवालों, लापता लोगों के मामलों और वायरल फुटेज के स्रोत को लेकर आधिकारिक जांच के निष्कर्षों का इंतजार है। अलग-अलग घटनाओं और आरोपों के बीच संबंध स्थापित करने के लिए जांच के नतीजे महत्वपूर्ण होंगे।



