पीलीभीत: पीलीभीत टाइगर रिजर्व के मुस्तफाबाद में वन्यजीव संरक्षण के जमीनी प्रहरियों के सम्मान, सुरक्षा और आर्थिक भविष्य को मजबूत करने के लिए महत्वपूर्ण पहल की गई। सरोजनीनगर विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह ने कार्यक्रम में 140 बाघ मित्रों के साथ वनकर्मियों, गाइड्स और ड्राइवर्स को सम्मानित किया और उनके कल्याण के लिए कई महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं।
यह तराई क्षेत्र में Environment Warriors की ओर से आयोजित 10वां वन्यजीव संरक्षण कार्यक्रम था। इसका आयोजन श्री माँ पीताम्बरा बगलामुखी सिद्धि पीठ उत्तराखंड ट्रस्ट के सहयोग से किया गया। कार्यक्रम में पूरनपुर विधायक बाबूराम पासवान, पीलीभीत के DFO मनीष सिंह, IFS, अंतरराष्ट्रीय ख्यातिप्राप्त Wildlife Filmmaker सुब्बैया नल्लामुथु, Environment Warriors के Founder एवं Ambalika Group of Institutions के Chairman अम्बिका मिश्रा और Ranger शैलेन्द्र कुमार मौजूद रहे।
140 बाघ मित्रों का सम्मान
बाघ और वन्यजीव संरक्षण में योगदान देने वाले 140 बाघ मित्रों को प्रशस्ति-पत्र, टॉर्च और साड़ी देकर सम्मानित किया गया। जंगलों की कठिन परिस्थितियों में काम करने वाले वनकर्मियों की सुरक्षा और प्राथमिक उपचार के लिए वन विभाग को 50 रेनकोट और 10 मेडिकल/फर्स्ट-एड किट भी दी गईं। वन्यजीव संरक्षण, पर्यटन और स्थानीय समुदाय के बीच महत्वपूर्ण कड़ी के तौर पर काम करने वाले गाइड्स और ड्राइवर्स को भी सम्मानित किया गया और उन्हें आवश्यक सामग्री उपलब्ध कराई गई।
बाघ मित्रों को बीमा और रोजगार से जोड़ने की पहल
डॉ. राजेश्वर सिंह ने घोषणा की कि अक्टूबर 2026 में Wildlife Week के दौरान विशेष बीमा शिविर आयोजित किया जाएगा। इसके तहत पात्र बाघ मित्रों को ₹5 लाख का जीवन बीमा और ₹2 लाख का चिकित्सा बीमा उपलब्ध कराने की दिशा में काम किया जाएगा।
बाघ संरक्षण के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले अगले वर्ष पांच सर्वश्रेष्ठ बाघ मित्रों को ₹25,000-₹25,000 की सम्मान राशि भी दी जाएगी। इसके अलावा बाघ मित्रों और अन्य पात्र संरक्षण सहयोगियों के बायोडाटा एकत्र कर उनकी योग्यता और मैदानी अनुभव के आधार पर रोजगार के अवसरों से जोड़ने की पहल की जाएगी। डॉ. सिंह ने यह भी आश्वासन दिया कि किसी बाघ मित्र या वन्यजीव संरक्षण से जुड़े सहयोगी की असमय मृत्यु होने पर उसके परिवार की जरूरतों और समस्याओं को ध्यान में रखते हुए यथासंभव सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।
पीलीभीत और तराई की वन्यजीव गाथा दुनिया तक पहुंचाएंगे सुब्बैया नल्लामुथु
कार्यक्रम में अंतरराष्ट्रीय ख्यातिप्राप्त Wildlife Filmmaker सुब्बैया नल्लामुथु ने तराई क्षेत्र और पीलीभीत टाइगर रिजर्व पर फिल्म बनाने की घोषणा की। उन्हें फिल्म निर्माण की अनुमति भी प्रदान की गई है। डॉ. राजेश्वर सिंह ने बताया कि वन्यजीव फिल्म निर्माण में उत्कृष्ट योगदान के लिए सुब्बैया नल्लामुथु को पांच बार राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है। उनकी फिल्मों ने भारतीय जंगलों, बाघों और अन्य वन्यजीवों की कहानियों को दुनिया तक पहुंचाया है।
रणथंभौर की प्रसिद्ध बाघिन ‘मछली’ पर बनाई गई उनकी फिल्म को भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लोकप्रियता मिली थी। पीलीभीत और तराई पर प्रस्तावित फिल्म में क्षेत्र के बाघों, तेंदुओं, जंगलों, घास के मैदानों, जैव विविधता, संरक्षण प्रयासों और स्थानीय समुदायों के योगदान को वैश्विक दर्शकों तक पहुंचाया जाएगा। इस फिल्म से पीलीभीत टाइगर रिजर्व को अंतरराष्ट्रीय पहचान मिलने के साथ जिम्मेदार Wildlife Tourism को बढ़ावा मिलने और स्थानीय गाइड्स, ड्राइवर्स, Homestays, हस्तशिल्पियों और ग्रामीण युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा होने की उम्मीद है।
पीलीभीत में जल्द शुरू होगा Leopard Rescue Centre
पीलीभीत के DFO मनीष सिंह, IFS ने बताया कि जिले में अत्याधुनिक Leopard Rescue Centre का जल्द उद्घाटन किया जाएगा। यह केंद्र तेंदुओं के रेस्क्यू, उपचार, पुनर्वास और वैज्ञानिक प्रबंधन को मजबूत करेगा। साथ ही मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाओं में तेज प्रतिक्रिया सुनिश्चित करने में भी केंद्र की महत्वपूर्ण भूमिका होगी, जिससे स्थानीय नागरिकों और वन्यजीवों की सुरक्षा मजबूत होगी।
पीलीभीत को अंतरराष्ट्रीय Wildlife Destination बनाने का लक्ष्य
पूरनपुर विधायक बाबूराम पासवान ने कहा कि पीलीभीत को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त वन्यजीव पर्यटन स्थल बनाने और पीलीभीत टाइगर रिजर्व को देश के सर्वश्रेष्ठ टाइगर रिजर्व्स में प्रथम स्थान दिलाने के लिए सामूहिक प्रयास किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि जिम्मेदार Wildlife Tourism स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार, ग्रामीण परिवारों की आय बढ़ाने और पूरे तराई क्षेत्र के आर्थिक विकास में अहम भूमिका निभा सकता है।
₹10 लाख के प्रस्ताव की प्रभावी पैरवी का आश्वासन
डॉ. राजेश्वर सिंह ने वन्यजीव संरक्षण और इससे जुड़े हितधारकों के कल्याण के लिए शासन को भेजे गए ₹10 लाख के प्रस्ताव की प्रभावी पैरवी करने का आश्वासन दिया। उन्होंने कहा कि प्रस्ताव की जल्द स्वीकृति और क्रियान्वयन के लिए उचित स्तर पर विषय उठाया जाएगा।
डॉ. राजेश्वर सिंह ने कहा कि बाघ मित्र, वनकर्मी, गाइड्स और ड्राइवर्स जंगल और वन्यजीवों की सुरक्षा की सबसे मजबूत जमीनी कड़ी हैं। उनके मुताबिक इन लोगों का सम्मान केवल प्रशस्ति-पत्र तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि उन्हें बीमा, स्वास्थ्य सुविधाएं, सुरक्षा उपकरण, रोजगार के अवसर और परिवारों को सामाजिक सुरक्षा भी मिलनी चाहिए। उन्होंने कहा कि वन्यजीव संरक्षण केवल सरकारी प्रयासों से सफल नहीं हो सकता। जंगलों के आसपास रहने और काम करने वाले समुदायों को संरक्षण अभियान का सम्मानित, सुरक्षित और आर्थिक रूप से सशक्त भागीदार बनाना जरूरी है।



