लखनऊ: उत्तर प्रदेश पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड को राज्य विद्युत नियामक आयोग से बहुत बड़ा झटका लगा है। नियामक आयोग ने यूपीपीसीएल द्वारा प्रस्तावित 10% बिजली टैरिफ में बढ़ोतरी को पूरी तरह से अवैध करार दिया है। इस फैसले के बाद पावर कॉर्पोरेशन की इसी महीने से उपभोक्ताओं की जेब से अतिरिक्त वसूली करने की योजना पर पानी फिर गया है। वहीं दूसरी ओर, उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद ने इसे राज्य के करोड़ों बिजली उपभोक्ताओं की एक बड़ी और ऐतिहासिक जीत बताया है।
यह आदेश नियामक आयोग ने उपभोक्ता परिषद की याचिका पर सुनवाई करने के बाद जारी किया, जिससे जनता को बड़ी राहत मिली है।
इसी महीने से वसूली की तैयारी में था UPPCL
उत्तर प्रदेश पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड ने राज्य में बिजली की दरों को 10% तक बढ़ाने का पूरा खाका तैयार कर लिया था। विभाग की योजना इसी चालू महीने से बढ़े हुए दामों के साथ उपभोक्ताओं से बिल वसूलने की थी। इसके लिए आंतरिक स्तर पर सभी तैयारियां भी पूरी कर ली गई थीं।
लेकिन, मामला जैसे ही विद्युत नियामक आयोग के पास पहुंचा, आयोग ने कड़ा रुख अपनाते हुए कॉर्पोरेशन के इस कदम पर ‘डंडा’ चला दिया। आयोग ने साफ कहा कि बिना उचित प्रक्रिया और नियमों के इस तरह से टैरिफ में 10% की बढ़ोतरी करना पूरी तरह गैर-कानूनी और अवैध है।
उपभोक्ता परिषद की आयोग में बड़ी जीत
बिजली दरों में इस बढ़ोतरी के खिलाफ ‘उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद’ ने मोर्चा खोल रखा था। परिषद ने नियामक आयोग के सामने पुरजोर तरीके से दलीलें पेश कीं और यह साबित किया कि पावर कॉर्पोरेशन का यह फैसला नियमों के विरुद्ध और आम जनता पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ डालने वाला है।
आयोग के इस ऐतिहासिक फैसले के बाद उपभोक्ता परिषद में जश्न का माहौल है। परिषद के पदाधिकारियों का कहना है कि पावर कॉर्पोरेशन लगातार उपभोक्ताओं पर घाटे का ठीकरा फोड़ने की कोशिश करता रहा है, लेकिन नियामक आयोग ने इस अवैध बढ़ोतरी को खारिज करके यह साफ कर दिया है कि प्रदेश में कानून और नियमों के तहत ही व्यवस्था चलेगी। यह राज्य के करोड़ों शहरी और ग्रामीण बिजली उपभोक्ताओं की सामूहिक जीत है।
नियामक आयोग के फैसले के मुख्य बिंदु
बता दें, नियामक आयोग ने साफ किया कि 10% टैरिफ बढ़ाने का UPPCL का फैसला नियमों के दायरे से बाहर था, इसलिए इसे तत्काल प्रभाव से खारिज किया जाता है।
वहीं, इस महीने से होने वाली किसी भी प्रकार की अतिरिक्त बिजली बिल वसूली पर अब पूर्णतः रोक लग गई है। उपभोक्ताओं को पुराने निर्धारित टैरिफ के हिसाब से ही बिल देना होगा। आयोग ने पावर कॉर्पोरेशन को भविष्य में भी बिना पूर्व अनुमति और जनसुनवाई की प्रक्रियाओं को पूरा किए इस तरह के मनमाने फैसले न लेने की हिदायत दी है।
विद्युत नियामक आयोग के इस फैसले से जहां एक तरफ उत्तर प्रदेश के आम घरेलू, व्यावसायिक और ग्रामीण उपभोक्ताओं ने राहत की सांस ली है, वहीं दूसरी तरफ वित्तीय संकट से जूझ रहे पावर कॉर्पोरेशन को अपने राजस्व घाटे की भरपाई के लिए अब नए और वैध रास्ते तलाशने होंगे।












