अयोध्या: राम मंदिर में दानपात्र और चढ़ावे की धनराशि में हुए कथित गबन के मामले में हर दिन ऐसे खुलासे हो रहे जो कि काफी हैरान कर देने वाला है । अब इस पूरे मामले में अब तक का सबसे चौंकाने वाला खुलासा सामने आया है। बता दे जांच के मुताबिक, दानपात्रों की धनराशि में केवल हेराफेरी ही नहीं की जा रही थी, बल्कि उससे जुड़े डिजिटल सबूतों को पूरी तरह मिटाने का एक बड़ा खेल लंबे समय से चल रहा था। इस पूरे मामले में सबसे बड़ा खुलासा यह हुआ है कि मंदिर परिसर के सीसीटीवी (CCTV) कैमरों से करीब 8 महीने का पूरा डेटा डिलीट कर दिया गया है।

खौफनाक धमकियां दी जाती थीं

विशेष जांच टीम (SIT) की तफ्तीश, पूर्व लेखा प्रभारी महिपाल सिंह और ट्रस्ट के पूर्व इंजीनियर दीनानाथ वर्मा के बयानों से जो बातें सामने आ रही हैं, वे बेहद गंभीर हैं। सूत्रों के मुताबिक, इस महा-गबन के खेल में एक सोची-समझी रणनीति के तहत काम किया जा रहा था। जो ट्रस्ट कर्मी या अधिकारी इस वित्तीय हेराफेरी का हिस्सा बनने से इनकार करते थे या इसका विरोध करते थे, उन्हें प्रताड़ित किया जाता था। विरोध करने वाले ईमानदार कर्मचारियों को “हमारे साथ रहो वरना अयोध्या छोड़ दो” जैसी खौफनाक धमकियां दी जाती थीं या फिर उन्हें नौकरी से बाहर का रास्ता दिखा दिया जाता था।

गबन को छिपाने के लिए सबूतों को जानबूझकर नष्ट किया गया

8 महीने का सीसीटीवी फुटेज गायब होना इस बात का सीधा प्रमाण है कि गबन को छिपाने के लिए सबूतों को जानबूझकर नष्ट किया गया। अब एसआईटी के सामने कई तीखे सवाल खड़े हैं: राम मंदिर जैसे आस्था के सबसे बड़े केंद्र में दान, चढ़ावे और सुरक्षा व्यवस्था पर आखिर किसका नियंत्रण था ? सीसीटीवी का इतना बड़ा डेटा किसके आदेश पर और किसने डिलीट किया ? और मंदिर के भीतर ईमानदार कर्मचारियों को डराने-धमकाने वाला यह सिंडिकेट और नेटवर्क कौन चला रहा था? एसआईटी इन सभी बिंदुओं पर गहराई से कड़ियां जोड़ रही है, और जल्द ही इस बड़ी साजिश के मास्टरमाइंड का पर्दाफाश होने की उम्मीद है।

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