देश के सबसे बड़े निजी क्षेत्र के बैंकों में से एक, एचडीएफसी बैंक के भीतर का आंतरिक विवाद अब खुलकर सामने आ गया है। बैंक के पूर्व चेयरमैन अतनु चक्रवर्ती ने बैंक बोर्ड की कार्यप्रणाली और उनके इस्तीफे के बाद शुरू की गई कानूनी जांच को लेकर बेहद गंभीर और तीखे सवाल उठाए हैं। चक्रवर्ती के इन सनसनीखेज बयानों के बाद देश के बैंकिंग सेक्टर और कॉर्पोरेट गवर्नेंस के गलियारों में हड़कंप मच गया है।

“मेरे निजी मूल्यों और नैतिकता के खिलाफ थीं बैंक की प्रथाएं”
प्राप्त रिपोर्टों के मुताबिक, अतनु चक्रवर्ती ने इसी साल मार्च महीने में अपने पद से तत्काल प्रभाव से इस्तीफा देकर सबको चौंका दिया था। उस वक्त इस्तीफा देते हुए उन्होंने बेहद गंभीर टिप्पणी की थी कि बैंक के भीतर चल रही कुछ आंतरिक घटनाएं और प्रथाएं उनके निजी मूल्यों, सिद्धांतों और नैतिकता से मेल नहीं खाती हैं।

चक्रवर्ती का मानना था कि उनके इस कड़े कदम और इस्तीफे के बाद बैंक का बोर्ड आत्ममंथन करेगा और व्यवस्था में जरूरी सुधार लाएगा। लेकिन अब उनका आरोप है कि पूरा मामला केवल एक “कंप्लायंस एक्सरसाइज” (कागजी खानापूर्ति) बनकर रह गया।

बाहरी लॉ फर्मों की क्लीन चिट पर उठाए सवाल
स्पष्टीकरण मांगने पर भी बोर्ड रहा मौन]

अतनु चक्रवर्ती के इस्तीफे और गंभीर आरोपों के बाद HDFC बैंक ने बाहरी लॉ फर्मों से एक स्वतंत्र कानूनी समीक्षा कराई थी। इन लॉ फर्मों ने अपनी रिपोर्ट में बैंक को क्लीन चिट देते हुए कहा कि उपलब्ध दस्तावेजों और गवाहों के आधार पर चक्रवर्ती द्वारा लगाए गए आरोपों की पुष्टि नहीं हुई है।

अब इस क्लीन चिट और जांच की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए पूर्व चेयरमैन ने कहा है कि उन्होंने मार्च में पद छोड़ने के बाद से इस स्वतंत्र कानूनी समीक्षा के दायरे और इसके कानूनी आधार को लेकर बार-बार बैंक बोर्ड से स्पष्टीकरण और जवाब मांगा था। लेकिन बेहद अचरज की बात है कि इतने ऊंचे पद पर रहे व्यक्ति द्वारा उठाए गए गंभीर सवालों पर भी बैंक बोर्ड ने उन्हें अब तक कोई जवाब नहीं दिया है। पूर्व चेयरमैन और बोर्ड के बीच का यह टकराव आने वाले दिनों में बैंकिंग रेगुलेटर आरबीआई (RBI) की दखल का कारण भी बन सकता है।

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