पैसे की तंगी से जूझ रहे किसानों को बड़ी राहत देते हुए, राज्य सरकार ने राज्य बजट की एक अहम घोषणा को पूरा करते हुए एकमुश्त सेटलमेंट पॉलिसी के तहत ‘कृषि कर्ज ब्याज सहायता योजना’ शुरू करने का फैसला किया है। इस स्कीम से उन किसानों को मदद मिलेगी जिनकी खेती की ज़मीन लोन न चुका पाने की वजह से नीलाम होने का खतरा है। शनिवार को जारी एक बयान के मुताबिक, किसानों के लिए शुरू की गई इस पहल के तहत, हिमाचल प्रदेश सरकार हर किसान के 3 लाख रुपये तक के कृषि लोन पर बकाया ब्याज का 50 प्रतिशत वहन करेगी।

किसानों के लिए 50 करोड़ रुपये का बजट रखा गया

इस स्कीम से राज्य भर के करीब 6,356 किसानों को फायदा होने की उम्मीद है और इसके लिए 50 करोड़ रुपये का बजट रखा गया है। यह स्कीम ‘हिमाचल प्रदेश स्टेट कोऑपरेटिव एग्रीकल्चर एंड रूरल डेवलपमेंट बैंक’ और ‘कांगड़ा कोऑपरेटिव एग्रीकल्चर एंड रूरल डेवलपमेंट बैंक’ के ज़रिए लागू की जाएगी। संबंधित ब्रांच ब्याज सब्सिडी पाने के लिए योग्य कर्जदारों की पहचान करेंगी और उनकी लिस्ट तैयार करेंगी।

इस स्कीम के तहत सरकार किन किसानों की मदद करेगी ?

हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा कि किसान राज्य की इकॉनमी की रीढ़ हैं और उनकी भलाई सरकार की सबसे बड़ी प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि मुश्किल हालात की वजह से कई किसान पैसे की दिक्कतों का सामना कर रहे हैं और इसलिए सरकार ने योग्य लाभार्थियों को एकमुश्त मदद देने का फैसला किया है। इस स्कीम में वे किसान शामिल होंगे जिनके खेती के लोन खत्म हो गए हैं और जिनकी ज़मीन फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशन द्वारा नीलाम किए जाने का खतरा है।

मुख्यमंत्री ने स्कीम को तेज़ी से लागू करने का निर्देश दिया

मुख्यमंत्री ने कहा कि बकाया ब्याज का आधा बोझ हटाकर, सरकार का मकसद कर्ज़ को रेगुलेट करने में मदद करना, फाइनेंशियल स्ट्रेस कम करना और किसानों को अपनी ज़मीन खोने के डर के बिना खेती जारी रखने में मदद करना है। उन्होंने संबंधित डिपार्टमेंट और फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशन को स्कीम को तेज़ी से लागू करने का निर्देश दिया ताकि ज़रूरतमंद किसानों को समय पर मदद मिल सके।

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