गुवाहाटी: कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के सह-संयोजक आशुतोष रांका और पार्टी के कई कार्यकर्ताओं को रविवार, 27 सितंबर को गुवाहाटी में पुलिस ने हिरासत में लिया। यह कार्रवाई पार्टी की प्रस्तावित क्षेत्रीय स्वयंसेवक बैठक से पहले हुई। अलग-अलग रिपोर्टों में हिरासत में लिए गए कार्यकर्ताओं की संख्या 30 से अधिक बताई गई है।
बैठक से पहले पुलिस ने लिया हिरासत में
CJP के मुताबिक, पार्टी की क्षेत्रीय स्वयंसेवक बैठक आयोजित होनी थी। रांका और अन्य कार्यकर्ता बैठक से पहले एक निजी आवास पर मौजूद थे, जहां से पुलिस ने उन्हें हिरासत में लिया। बाद में उन्हें गुवाहाटी के काहिलीपाड़ा इलाके में असम पुलिस की 10वीं बटालियन के मुख्यालय ले जाने की जानकारी सामने आई।
CJP ने पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि बैठक को रोकने के लिए कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया गया। हालांकि, पुलिस की ओर से इस कार्रवाई पर तत्काल विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई थी।
हिरासत के बाद रिहा हुए आशुतोष रांका
बाद में आशुतोष रांका और अन्य CJP सदस्यों को पुलिस हिरासत से रिहा कर दिया गया। रिहाई के बाद रांका ने सोशल मीडिया पर दावा किया कि उनकी हिरासत ‘अवैध’ थी और कहा कि उन्होंने पुलिस से उसी स्थान पर वापस छोड़ने को कहा, जहां से उन्हें हिरासत में लिया गया था।
रांका ने बाद में प्रेस कॉन्फ्रेंस में भी आरोप लगाया कि पुलिस ने उन्हें हिरासत में लेने का स्पष्ट आधार नहीं बताया और अधिकारियों ने केवल ‘ऊपर से आदेश’ मिलने की बात कही। यह रांका का आरोप है; इसकी स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध रिपोर्टों में नहीं हुई है।
हिमंत बिस्वा सरमा पर रांका का हमला
रिहाई के बाद आशुतोष रांका ने असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा को लेकर तीखी टिप्पणी की। उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा कि “असम के कॉकरोचों ने अभी सिर्फ शुरुआत की है।” इससे पहले भी रांका ने मुख्यमंत्री पर CJP की गतिविधियों से डरने का आरोप लगाया था।
अभिजीत दीपके ने भी दी प्रतिक्रिया
CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके ने रांका और अन्य कार्यकर्ताओं की हिरासत पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि वह भी पुलिस स्टेशन में उनके साथ प्रदर्शन में शामिल होने वाले थे। दीपके ने इससे पहले रांका और कार्यकर्ताओं की रिहाई की मांग करते हुए कहा था कि यदि उन्हें नहीं छोड़ा गया तो वह अन्य सदस्यों के साथ असम पहुंचेंगे।
विपक्षी दलों ने भी उठाए सवाल
रांका और CJP कार्यकर्ताओं की हिरासत को लेकर असम के कुछ विपक्षी दलों और संगठनों ने भी सवाल उठाए और उनकी रिहाई की मांग की। द न्यू इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक, कांग्रेस, असम जातीय परिषद, राइजर दल और आम आदमी पार्टी से जुड़े नेताओं ने इस कार्रवाई पर सवाल उठाए।












