मेरठ/मुजफ्फरनगर: बैंक खाते अनफ्रीज कराने के नाम पर नोएडा के एक फर्नीचर कारोबारी से कथित वसूली का मामला सामने आया है। कारोबारी शाहिद चौधरी ने मेरठ के लिसाड़ी गेट थाने में हिरासत में रखकर प्रताड़ित करने और छोड़ने के बदले रुपये मांगने का आरोप लगाया है। शिकायत में पुलिसकर्मियों के साथ थाने के पास साइबर कैफे चलाने वाले एक व्यक्ति की भूमिका भी सामने आई है। मामले में मेरठ और मुजफ्फरनगर के तीन पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया गया है। वहीं, जांच में लापरवाही के आरोप में एक सीओ को अंतिम चेतावनी दी गई है।
कारोबारी को हवालात में रखने और प्रताड़ित करने का आरोप
नोएडा के गेझा, सेक्टर-93 निवासी शाहिद चौधरी सोफा और फर्नीचर का कारोबार करते हैं। शाहिद के मुताबिक, उनकी पत्नी का बैंक खाता फ्रीज हो गया था। इसे अनफ्रीज कराने के सिलसिले में वह मेरठ के लिसाड़ी गेट थाने पहुंचे थे।
आरोप है कि थाने में पुलिसकर्मियों ने उनके साथ दुर्व्यवहार किया और उन्हें हवालात में बंद कर दिया। कारोबारी ने मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित करने का भी आरोप लगाया है।
आठ लाख रुपये मांगने का आरोप, चार लाख देने पर छोड़ा
शाहिद चौधरी ने शिकायत में दावा किया कि हिरासत के दौरान उनका आईफोन, घड़ी और बेल्ट भी अपने कब्जे में ले लिए गए। उन्हें और उनके भाई सनवर के खिलाफ कार्रवाई करने की धमकी दी गई।
कारोबारी का आरोप है कि थाने से छोड़ने के बदले उनसे आठ लाख रुपये मांगे गए। इस दौरान कुछ सादे कागजों पर हस्ताक्षर भी कराए गए। शाहिद के मुताबिक, 4 अगस्त 2026 को करीब चार लाख रुपये देने के बाद उन्हें छोड़ा गया। हालांकि, उनकी घड़ी और बेल्ट वापस नहीं की गई।
बैंक ट्रांसफर और नकदी से रकम लेने का दावा
शाहिद ने अपनी शिकायत में करीब 4.72 लाख रुपये की कथित वसूली का विवरण दिया है। उनके आरोप के मुताबिक, 4 अगस्त को उनके बैंक खाते से 1.20 लाख रुपये का लेन-देन हुआ, जबकि 2.80 लाख रुपये नकद थाने के सामने स्थित साइबर कैफे संचालक शादाब राव को दिए गए।
कारोबारी ने भुगतान से जुड़े रिकॉर्ड और अन्य दस्तावेज भी शिकायत के साथ दिए हैं। मामले की जांच में इन लेन-देन की परिस्थितियों और संबंधित लोगों की भूमिका की पड़ताल की जा रही है।
36-36 हजार रुपये ऑनलाइन ट्रांसफर कराने का आरोप
शाहिद के मुताबिक, 5 अगस्त को साइबर कैफे संचालक शादाब राव ने मोबाइल फोन के जरिए उनकी बात दरोगा अंकित सागर और हेड कॉन्स्टेबल नीरज कुमार से कराई।
आरोप है कि इसके बाद मोहम्मद इमरान और सुशीला के बैंक खातों में 36-36 हजार रुपये ऑनलाइन ट्रांसफर करने के लिए कहा गया। कारोबारी का दावा है कि यह रकम अधिकारियों को सोफा सेट देने के नाम पर मांगी गई थी।
साइबर कैफे संचालक की भूमिका की जांच
इस मामले में थाने के सामने साइबर कैफे चलाने वाले शादाब राव की भूमिका की भी जांच की जा रही है। यह पता लगाया जा रहा है कि क्या वह पुलिसकर्मियों के कहने पर कारोबारी से रकम मांग रहा था।
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि साइबर कैफे की दुकान थाने के सामने होने के कारण शादाब की पुलिसकर्मियों से अच्छी जान-पहचान थी। मामले की जांच मेरठ के एसपी सिटी कर रहे हैं।
मुजफ्फरनगर में भी एक लाख रुपये लेने का आरोप
मामले की दूसरी कड़ी मुजफ्फरनगर के खतौली क्षेत्र की पमनावली चौकी से जुड़ी है। शाहिद का आरोप है कि उनकी पत्नी का बैंक खाता अनफ्रीज कराने के बदले चौकी प्रभारी दरोगा आरिफ अली ने एक लाख रुपये लिए।
शिकायत के मुताबिक, कारोबारी के भाई से यह रकम ली गई और इसके बाद भी शेष धनराशि देने के लिए दबाव बनाया गया। शाहिद ने एक लाख रुपये दिए जाने से संबंधित वीडियो साक्ष्य के तौर पर उपलब्ध कराया।
इसके बाद मुजफ्फरनगर के एसएसपी सूरज राय ने पमनावली चौकी प्रभारी आरिफ अली को निलंबित कर दिया। मामले की जांच सीओ रुपाली राय को सौंपी गई है।
तीन पुलिसकर्मी निलंबित, जांच के निर्देश
मामले में मेरठ के दरोगा अंकित सागर, हेड कॉन्स्टेबल नीरज कुमार और मुजफ्फरनगर की पमनावली चौकी प्रभारी दरोगा आरिफ अली को निलंबित कर दिया गया है।
डीआईजी कलानिधि नैथानी ने प्रकरण की जांच के निर्देश दिए हैं। मेरठ में मामले की जांच सीओ साइबर क्राइम सौम्या अस्थाना को सौंपी गई है।
वहीं, पीड़ित से बात किए बिना जांच पूरी करने के मामले में सीओ कोतवाली संग्राम सिंह को अंतिम चेतावनी दी गई है। फिलहाल, मामले में लगाए गए आरोपों की जांच की जा रही है।













