मिडिल ईस्ट में ड्रोन और मिसाइलों से जुड़े खतरे बढ़ने के बीच अमेरिका हाई-एनर्जी लेजर हथियारों की क्षमता बढ़ाने पर काम कर रहा है। अमेरिकी नौसेना लंबे समय से ऐसे डायरेक्टेड-एनर्जी सिस्टम विकसित कर रही है, जो पारंपरिक मिसाइल या गोला-बारूद इस्तेमाल किए बिना कुछ हवाई और सतही लक्ष्यों को निशाना बना सकते हैं।
इसी तकनीक का एक प्रमुख उदाहरण HELIOS (High Energy Laser with Integrated Optical-dazzler and Surveillance) है। अमेरिकी नौसेना के रिकॉर्ड के मुताबिक HELIOS को USS Preble पर लगाया गया है। यह सिस्टम हाई-एनर्जी लेजर के साथ ऑप्टिकल डैजलिंग और सर्विलांस क्षमता को जोड़ता है।
क्या है अमेरिकी नौसेना का HELIOS लेजर हथियार?
HELIOS को युद्धपोतों के लिए विकसित किया गया है। इसका उद्देश्य ड्रोन, कुछ छोटे सतही लक्ष्यों और दुश्मन के ISR यानी Intelligence, Surveillance and Reconnaissance सेंसर से जुड़े खतरों का मुकाबला करना है।
इस तरह के सिस्टम में लक्ष्य पर पारंपरिक इंटरसेप्टर मिसाइल भेजने के बजाय निर्देशित ऊर्जा की किरण का इस्तेमाल किया जाता है। अमेरिकी नौसेना के USS Preble के आधिकारिक रिकॉर्ड में HELIOS को जहाज के हथियार सिस्टम का हिस्सा बताया गया है।
HELIOS को 60 किलोवाट श्रेणी के हाई-एनर्जी लेजर सिस्टम के तौर पर विकसित किया गया है। इसकी क्षमता भविष्य में और अधिक शक्तिशाली डायरेक्टेड-एनर्जी हथियारों की दिशा में भी देखी जाती है।
लेजर से ड्रोन को कैसे निशाना बनाया जाता है?
लेजर आधारित हथियार प्रणाली में सबसे पहले रडार और दूसरे सेंसर की मदद से लक्ष्य का पता लगाया जाता है। इसके बाद ऑप्टिकल सिस्टम लक्ष्य को ट्रैक करता है और लेजर बीम को एक निश्चित हिस्से पर केंद्रित किया जाता है।
लेजर का लगातार एक ही बिंदु पर ऊर्जा पहुंचाना लक्ष्य के महत्वपूर्ण हिस्से को गर्म या नुकसान पहुंचा सकता है। ऑप्टिकल डैजलिंग जैसी क्षमता का इस्तेमाल सेंसर को प्रभावित करने के लिए भी किया जा सकता है।
इस तकनीक की खासियत यह है कि हर लक्ष्य के लिए अलग इंटरसेप्टर मिसाइल खर्च करने की जरूरत नहीं होती। हालांकि, लेजर हथियार पूरी तरह ‘मुफ्त’ नहीं है। इसे चलाने के लिए पर्याप्त बिजली, कूलिंग और दूसरे सपोर्ट सिस्टम की जरूरत होती है।
मिसाइल की जगह लेजर क्यों?
छोटे ड्रोन की कीमत कई बार उन्हें रोकने के लिए इस्तेमाल होने वाली महंगी इंटरसेप्टर मिसाइल से कम हो सकती है। ऐसे में हर छोटे हवाई लक्ष्य के खिलाफ मिसाइल का इस्तेमाल आर्थिक रूप से चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
लेजर हथियारों का एक आकर्षण यह है कि इनके लिए पारंपरिक मिसाइलों जैसी अलग-अलग इंटरसेप्टर यूनिट की जरूरत नहीं होती। अमेरिकी नौसेना ने भी डायरेक्टेड-एनर्जी हथियारों के संभावित लाभों में कम लागत वाले प्रति-एंगेजमेंट विकल्प की बात की है।
लेकिन इसकी सीमाएं भी हैं। सिस्टम को लगातार बिजली और कूलिंग चाहिए और वातावरण की परिस्थितियां लेजर के प्रदर्शन को प्रभावित कर सकती हैं। इसलिए लेजर हथियारों को मौजूदा मिसाइल और गन सिस्टम का तत्काल पूर्ण विकल्प मानने के बजाय एक अतिरिक्त रक्षा क्षमता के रूप में देखा जाता है।
Xbox जैसा कंट्रोलर क्यों आया चर्चा में?
अमेरिकी नौसेना के लेजर हथियारों की चर्चा में वीडियो-गेम जैसे कंट्रोलर का जिक्र भी होता रहा है। हालांकि, यह HELIOS की कोई खास ‘गेमिंग टेक्नोलॉजी’ नहीं है।
2014 में अमेरिकी नौसेना ने LaWS (Laser Weapon System) का USS Ponce पर फारस की खाड़ी में परीक्षण किया था। उस सिस्टम को वीडियो-गेम जैसे कंट्रोलर से संचालित किया गया था। परीक्षणों में LaWS ने एक ScanEagle UAV समेत कई लक्ष्यों को निशाना बनाया था।
इसका उद्देश्य ऑपरेटर के लिए लक्ष्य को ट्रैक करने और सिस्टम को नियंत्रित करने की प्रक्रिया को आसान बनाना था। वास्तविक हथियार प्रणाली में इसके पीछे रडार, सेंसर, फायर-कंट्रोल और अन्य सैन्य तकनीकें भी काम करती हैं।
अमेरिका ने पहले ही खाड़ी में लेजर हथियार का परीक्षण किया था
अमेरिका का लेजर हथियार कार्यक्रम नया नहीं है। 2014 में USS Ponce पर तैनात LaWS ने फारस की खाड़ी में वास्तविक समुद्री वातावरण में परीक्षण किया था।
अमेरिकी नौसेना के अनुसार, परीक्षण के दौरान सिस्टम ने तेज गति से आने वाली छोटी नाव पर लगे लक्ष्य और एक मानवरहित विमान को निशाना बनाया था। नौसेना ने उस समय इसे जहाज पर डायरेक्टेड-एनर्जी हथियार के संचालन का महत्वपूर्ण प्रदर्शन बताया था।
क्या होर्मुज में HELIOS तैनात है?
यहां एक महत्वपूर्ण अंतर समझना जरूरी है। अमेरिकी नौसेना के आधिकारिक रिकॉर्ड से USS Preble पर HELIOS की मौजूदगी की पुष्टि होती है, लेकिन उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर यह कहना कि HELIOS को विशेष रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य में तैनात कर दिया गया है, अलग से पुष्ट नहीं होता।
मध्य पूर्व और खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी नौसेना की मौजूदगी अलग तथ्य है, जबकि किसी खास युद्धपोत पर HELIOS की तैनाती और उसकी परिचालन स्थिति को अलग-अलग देखना जरूरी है।
आगे कितनी ताकतवर हो सकती है लेजर तकनीक?
अमेरिकी रक्षा विभाग और नौसेना लंबे समय से ज्यादा शक्तिशाली डायरेक्टेड-एनर्जी हथियारों पर काम कर रहे हैं। अमेरिकी नौसेना के अधिकारियों ने भी अधिक शक्तिशाली जहाज-आधारित लेजर क्षमताओं में निवेश की जरूरत पर बात की है।
इसका मतलब यह है कि आने वाले समय में अमेरिकी युद्धपोतों पर लेजर हथियारों का इस्तेमाल ड्रोन और अन्य कम लागत वाले हवाई खतरों के खिलाफ मौजूदा गन और मिसाइल सिस्टम के साथ मिलकर किया जा सकता है। HELIOS इसी व्यापक तकनीकी दिशा का एक हिस्सा है।














