उत्तर प्रदेश के मेरठ क्षेत्र से पुलिस महकमे को शर्मसार करने वाला एक बेहद गंभीर मामला सामने आया है। झूठे एनकाउंटर की धमकी देकर 6 लाख रुपये की रंगदारी वसूलने और अपहरण जैसी वारदातों के आरोप में बुलंदशहर के सिकंदराबाद थाने में तैनात रहे तत्कालीन पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर (FIR) दर्ज कर ली गई है। डीआईजी (DIG) कलानिधि नैथानी के कड़े एक्शन के बाद इस मामले में पुलिस विभाग के भीतर हड़कंप मच गया है।
क्या है पूरा मामला?
शिकायतकर्ता सलमान ने डीआईजी को सीधे प्रार्थना पत्र देकर अपनी आपबीती सुनाई थी। सलमान के मुताबिक, 30 अप्रैल 2026 को सिकंदराबाद पुलिस ने उसे गुलावठी टोल प्लाजा से जबरन उठा लिया था। पुलिसकर्मी उसे थाने ले गए और 20 लाख रुपये की रंगदारी की मांग की। पैसे न देने पर उसे झूठे एनडीपीएस (NDPS) केस में फंसाकर पैर में गोली मारने की खौफनाक धमकी दी गई। आरोप है कि पुलिस ने पीड़ित और उसके भतीजे के साथ बेरहमी से मारपीट की और मानसिक दबाव बनाकर रात के 3 बजे 6 लाख रुपये की फिरौती वसूलने के बाद ही उन्हें रिहा किया।
तत्कालीन थाना प्रभारी समेत कई नामजद
पीड़ित की शिकायत और प्राथमिक जांच के आधार पर इस गंभीर मामले में सिकंदराबाद के तत्कालीन थाना प्रभारी निरीक्षक नीरज मलिक, उप-निरीक्षक (दरोगा) अरुण कुमार, कांस्टेबल योगेश और चार अन्य अज्ञात पुलिसकर्मियों के खिलाफ अपहरण, मारपीट और भ्रष्टाचार जैसी गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है। डीआईजी कलानिधि नैथानी के इस सख्त कदम से यह साफ हो गया है कि खाकी की आड़ में अवैध वसूली करने वाले किसी भी भ्रष्ट कर्मी को बख्शा नहीं जाएगा। फिलहाल मामले की गहनता से जांच की जा रही है और दोषियों के खिलाफ आगे की विभागीय व कानूनी कार्रवाई जारी है।












