नई दिल्ली। दिल्ली के जंतर-मंतर पर करीब एक महीने से शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर आंदोलन कर रही कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) का जन्म भले ही सोशल मीडिया पर एक मजाक के रूप में हुआ, लेकिन युवाओं का एक बड़ा वर्ग अब इसे उम्मीद भरी निगाहों से देख रहा है। गठन के चंद दिनों में ही भाजपा और कांग्रेस से अधिक सोशल मीडिया फॉलोअर्स जुटाने वाली सीजेपी को लेकर अब यह बड़ा सवाल उठने लगा है कि क्या भविष्य में यह एक राजनीतिक दल का स्वरूप ले लेगी? अभिजीत दीपके और उनकी टीम ने इस सवाल पर ‘हां या ना’ में सीधा जवाब देने से भले ही बचा लिया, लेकिन उनके संकेतों ने कई विकल्पों के खुले होने की ओर इशारा जरूर कर दिया।
क्या बोले सीजेपी के प्रवक्ता?
जंतर-मंतर पर एक इंटरव्यू के दौरान जब राजनीति में उतरने के विकल्प को लेकर सवाल किया गया तो सीजेपी फाउंडर अभिजीत दीपके ने खुद जवाब देने की बजाय अपने प्रवक्ताओं की ओर इशारा कर दिया। एक-एक करके तीनों प्रवक्ताओं ने अपने-अपने अंदाज में जवाब दिए, लेकिन भविष्य को लेकर कोई स्पष्ट रूपरेखा सामने नहीं रखी। सबसे पहले प्रवक्ता विजेता दहिया ने मोर्चा संभालते हुए कहा, राजनीति कोई खराब चीज नहीं है और लोगों को इसमें आना चाहिए। लेकिन अभी हमें लगता है कि जन आंदोलन की तरह इसकी संभावना ज्यादा है। लोकतंत्र का मतलब यह नहीं कि आप पांच साल में वोट देकर आ गए, बल्कि जिनको वोट दिया उनसे लगातार सवाल करना भी जरूरी है।
‘मीडिया ही कर देगी राजनीतिक दल घोषित’
दूसरे प्रवक्ता सौरव दास ने इस सवाल पर चुटकी लेते हुए कहा, इतने राजनीतिक दल हैं, 750-800 पार्टियां हैं, फिर भी लोगों में हताशा है तो उन्हें सोचना चाहिए कि वे कहां गलत कर रहे हैं। हमारा तो एक आंदोलन है। हमें इतना पूछा जाता है कि आप राजनीतिक दल बनोगे या नहीं कि ऐसा लग रहा है एक दिन मीडिया ही घोषणा कर देगी कि ये राजनीतिक दल हैं। उन्होंने कहा कि जब यह आंदोलन जमीन पर उतरेगा तो लोग किसी भी पार्टी से काम करा सकेंगे।
सभी विकल्प खुले हुए हैं
दहिया और दास के बाद तीसरे प्रवक्ता आशुतोष रांका ने माइक संभाला और भले ही उन्होंने भी सीधे हां या ना में जवाब नहीं दिया, लेकिन यह जरूर साफ कर दिया कि सभी विकल्प खुले हुए हैं। उन्होंने कहा, हर चीज का मतलब यह नहीं कि आप पांच साल में वोट मांगने जाओ राजनीतिक दल बनकर। सिविल सोसाइटी, प्रेशर ग्रुप और इस तरह के आंदोलन भी लोकतंत्र का हिस्सा हैं। हमारे लिए अभी मुद्दा जरूरी है और जवाबदेही तय करना हमारा लक्ष्य है। यह हमें जिस तरफ ले जाएगा, हम वहां जाएंगे। अंत में हमारी सबसे बड़ी लड़ाई यह है कि हमारी जेनरेशन की आवाज सुनी जाए और वह जिस तरह ज्यादा प्रभावी होगा, हम वही करेंगे।














