देशभर में E20 पेट्रोल के इस्तेमाल को लेकर सोशल मीडिया पर इन दिनों भ्रम की स्थिति बनी हुई है। पेट्रोल में 20% एथेनॉल ब्लेंडिंग को लेकर कई तरह के दावे किए जा रहे हैं, जिसमें इंजन खराब होने, माइलेज घटने और पेट्रोल टैंक पर चींटियों के जमा होने जैसी बातें शामिल हैं। अब पेट्रोलियम मंत्रालय ने इन तमाम अटकलों पर विराम लगाते हुए इसे वैज्ञानिक तथ्यों से परे बताया है। मंत्रालय का स्पष्ट कहना है कि E20 कोई नया प्रयोग नहीं है, बल्कि अमेरिका, ब्राजील और कनाडा जैसे देशों में यह वर्षों से सफलतापूर्वक उपयोग में लाया जा रहा है।
इंजन की सुरक्षा और माइलेज पर मंत्रालय की सफाई
इंजन खराब होने के दावों पर सरकार ने ARAI और IOCL जैसी संस्थाओं के व्यापक परीक्षणों का हवाला दिया है। परीक्षणों में सामने आया है कि आधुनिक वाहनों के इंजन, स्टार्टिंग और ड्राइविंग पर इसका कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं है, केवल पुराने वाहनों में रबर के कुछ पार्ट्स को समय से पहले बदलने की आवश्यकता पड़ सकती है। वहीं, माइलेज को लेकर सरकार ने पहली बार स्वीकार किया है कि इसमें हल्की गिरावट संभव है, लेकिन इसके साथ ही यह बेहतर पिकअप और कम कार्बन उत्सर्जन जैसे तकनीकी फायदे भी देता है। माइलेज पर अन्य कारक जैसे ड्राइविंग स्टाइल और सड़क की स्थिति का भी गहरा असर पड़ता है।
वायरल वीडियो और वैज्ञानिक तर्क
पेट्रोल टैंक पर चींटियों या मधुमक्खियों के आने वाले वायरल वीडियो को लेकर BPCL ने साफ किया है कि फ्यूल ग्रेड एथेनॉल में कोई शुगर नहीं होती है और इसमें मौजूद तत्व कीड़ों को दूर रखते हैं। सरकार ने इस पूरे कार्यक्रम के आर्थिक और पर्यावरणीय लाभ भी गिनाए हैं। मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, एथेनॉल ब्लेंडिंग से अब तक 1.90 लाख करोड़ रुपये से अधिक की विदेशी मुद्रा की बचत हुई है और किसानों को 1.60 लाख करोड़ रुपये का सीधा भुगतान हुआ है। भविष्य में E25 तक ब्लेंडिंग बढ़ाने से पहले व्यापक तकनीकी परीक्षण और उद्योग जगत से गहन चर्चा का आश्वासन भी दिया गया है।















