वाशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में फ्रांस में संपन्न जी-7 शिखर सम्मेलन के दौरान दिए गए अपने विवादित बयान पर चुप्पी तोड़ी है। उन्होंने सफाई देते हुए कहा कि जब वह बैठक कक्ष में पहुंचे और दुनिया के ताकतवर नेताओं के सामने खुद को ‘बॉस’ बताया, तो वह पूरी तरह से मजाक कर रहे थे और इस टिप्पणी को गलत संदर्भ में ले लिया गया।
ट्रंप ने इंटरव्यू में क्या कहा?
द एक्सिओस शो पर एक इंटरव्यू के दौरान जब होस्ट ने उस वायरल पल को याद करते हुए पूछा, आप अंदर गए और आपने कहा, मैं बॉस हूं। वहां मौजूद नेताओं में से कितनों ने इस बात पर विश्वास किया होगा? इस पर ट्रंप ने हंसते हुए जवाब दिया कि वह सिर्फ मजाकिया होने की कोशिश कर रहे थे।
पूरा वाकया क्या था?
ट्रंप ने बताया कि जब वह कमरे में दाखिल हुए तो सभी नेता पहले से अपनी-अपनी सीटों पर बैठे हुए थे। उन्होंने कहा, वे सभी जानी-मानी हस्तियां हैं, देशों के प्रमुख हैं। मैं अंदर गया और मैंने बस उनकी तरफ देखा और कहा कि मैं बॉस हूं। यह सिर्फ एक मजाक के तौर पर कहा गया था। लेकिन यह बात पूरी दुनिया में फैल गई। मुझे विश्वास नहीं हो रहा है। मैं सिर्फ मजाकिया होने की कोशिश कर रहा था, मैं बॉस बनने की कोशिश नहीं कर रहा था।
कब और कहां का है यह वाकया?
यह वाकया तीन दिवसीय जी-7 शिखर सम्मेलन के आखिरी दिन का है। बुधवार की सुबह जब ट्रंप अंतिम सत्र की बैठक में पहुंचे, तो वहां दूसरे नेता पहले से मौजूद थे। अपने 80वें जन्मदिन के जश्न के ठीक बाद ट्रंप शक्तिशाली लोकतांत्रिक देशों के इस अहम सम्मेलन में शामिल होने फ्रांस गए थे।
क्या है जी-7 का इतिहास?
जी-7 देश बारी-बारी से इस सम्मेलन की मेजबानी करते हैं। फ्रांस ने पिछले साल के मेजबान कनाडा से इसकी अध्यक्षता हासिल की थी और 2027 में इसे अमेरिका को सौंपेगा। इस ताकतवर क्लब का पहला शिखर सम्मेलन 1975 में फ्रांस के रामबौइलेट में हुआ था, जिसमें छह देशों—फ्रांस, पश्चिम जर्मनी, इटली, जापान, ब्रिटेन और अमेरिका के नेता एक मंच पर आए थे। इसका मकसद द्वितीय विश्व युद्ध के बाद आई सबसे बड़ी आर्थिक मंदी से उबरने के उपाय खोजना था। अगले ही वर्ष कनाडा के शामिल होने के बाद से इसे जी-7 के नाम से जाना जाने लगा।















