चंडीगढ़ में एक महत्वपूर्ण प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए पंजाब के वित्त मंत्री एडवोकेट हरपाल सिंह चीमा ने कहा कि पंजाब पहले से ही देश में सबसे अधिक सरकारी वेतनमान देने वाले अग्रणी राज्यों में शामिल है। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि राज्य कई श्रेणियों में केंद्र सरकार से भी अधिक वेतनमान प्रदान कर रहा है। वित्त मंत्री ने आरोप लगाया कि पूर्ववर्ती शिरोमणि अकाली दल-भाजपा तथा कांग्रेस सरकारों की वित्तीय mismanagement और गलत नीतियों के कारण वर्तमान सरकार को कर्मचारियों के वेतन आयोग के बकाये के रूप में 14,191 करोड़ रुपये की भारी-भरकम देनदारी विरासत में मिली है।
पिछली सरकारों पर वित्तीय बोझ डालने का आरोप
वित्त मंत्री चीमा ने स्पष्ट किया कि कर्मचारियों के वेतन आयोग की रिपोर्ट वर्ष 2016 में तत्कालीन अकाली-भाजपा सरकार के कार्यकाल के दौरान तैयार की गई थी, लेकिन राजनीतिक कारणों से इसे वर्षों तक लागू नहीं किया गया। यह रिपोर्ट केवल जुलाई 2021 में लागू हुई, जिससे 1 जनवरी 2016 से जुलाई 2021 तक के महंगाई भत्ते (डीए) के बकाये स्थगित हो गए और 14,191 करोड़ रुपये की देनदारी खड़ी हो गई। उन्होंने आगे कहा कि तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने अपने पूरे कार्यकाल में इन बकाया राशियों में से एक रुपया भी जारी नहीं किया, जिससे पूरा वित्तीय दबाव ‘आप’ सरकार पर आ गया।
‘आप’ सरकार द्वारा किए गए भुगतान और कानूनी कदम
आम आदमी पार्टी के नेतृत्व वाली सरकार के प्रयासों की जानकारी देते हुए वित्त मंत्री ने बताया कि हाईकोर्ट द्वारा स्वीकृत निपटान योजना के तहत सरकार अब तक कर्मचारियों को 6,000 करोड़ रुपये से अधिक के बकाये का भुगतान कर चुकी है। डीए वितरण से संबंधित हाईकोर्ट के ताजा फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने कहा कि राज्य का कानूनी तर्क यह है कि जब राज्य का वेतन ढांचा पहले ही केंद्र से अधिक है, तो दोनों जगह की उच्चतम दरों को एक साथ लागू करना वित्तीय रूप से कठिन होता है। सरकार इस फैसले का कानूनी परीक्षण कर रही है और सर्वोच्च न्यायालय में अपील समेत सभी वैध विकल्पों पर विचार कर रही है।












