केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) के नतीजों के बाद छात्रों और अभिभावकों में भारी असंतोष देखने को मिल रहा है। इस साल मूल्यांकन प्रणाली को लेकर छात्रों का गुस्सा इस कदर फूटा है कि हर चौथे छात्र ने अपनी उत्तर पुस्तिकाओं की स्कैन कॉपी मांगी है। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, अब तक 4 लाख से अधिक छात्र पुनर्मूल्यांकन (Re-evaluation) के लिए आवेदन कर चुके हैं, जिसके तहत कुल 11.31 लाख कॉपियों की दोबारा जांच करने की मांग की गई है।
इस भारी विरोध ने सीबीएसई की ‘ऑन-स्क्रीन मार्किंग’ (OSM) डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली को सीधे कटघरे में खड़ा कर दिया है। छात्रों का आरोप है कि डिजिटल चेकिंग में भारी गड़बड़ी हुई है, जिससे उनके नंबर उम्मीद से बेहद कम आए हैं। संकट का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि जैसे ही आवेदन के लिए पोर्टल खुला, शुरुआती 3 घंटों के भीतर ही 1.26 लाख से ज्यादा आवेदन आ गए। एक साथ लाखों छात्रों के लॉग-इन करने के कारण भारी दबाव से सीबीएसई की वेबसाइट भी क्रैश होने की कगार पर पहुंच गई।
चारों तरफ से घिरने के बाद अब यह बड़ा सवाल खड़ा हो गया है कि क्या सीबीएसई की मार्किंग व्यवस्था पर छात्रों के भरोसे का संकट पैदा हो गया है? इस बीच, सोशल मीडिया पर 12वीं की परीक्षा दोबारा कराने (Re-exam) की मांग तेज हो रही है, लेकिन बोर्ड ने साफ किया है कि 12वीं री-एग्जाम पर अभी कोई आधिकारिक फैसला नहीं लिया गया है।













