लखनऊ: उत्तर प्रदेश में त्रिस्तरीय पंचायत चुनावों की तारीखों को लेकर लंबे समय से चल रही तमाम अटकलें और कयास अब पूरी तरह से खत्म हो गए हैं। शासन स्तर से यह पूरी तरह स्पष्ट कर दिया गया है कि प्रदेश में पंचायत चुनाव अब वर्ष 2027 में होने वाले आगामी विधानसभा चुनावों के बाद ही संपन्न कराए जाएंगे। इस फैसले के बाद अब राज्य की कुल 57 हजार 695 ग्राम पंचायतों में मौजूदा ग्राम प्रधानों का कार्यकाल कल यानी 26 मई को समाप्त हो रहा है। नियमों के अनुसार, कार्यकाल खत्म होते ही ग्राम प्रधानों के सभी वित्तीय और प्रशासनिक अधिकार पूरी तरह स्वतः ही समाप्त हो जाएंगे।
प्रधान ही संभालेंगे प्रशासक की जिम्मेदारी?
ग्राम प्रधानों का कार्यकाल समाप्त होने के बाद सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा था कि गांवों के विकास कार्यों की जिम्मेदारी कौन संभालेगा? क्या सरकारी अधिकारियों को प्रशासक नियुक्त किया जाएगा या फिर प्रधानों को ही यह जिम्मेदारी दोबारा मिलेगी? इस महत्वपूर्ण सवाल का जवाब देते हुए उत्तर प्रदेश के पंचायती राज मंत्री ओपी राजभर ने ‘भारत समाचार’ से विशेष बातचीत में बड़ा खुलासा किया है।
पंचायती राज मंत्री ओपी राजभर ने साफ तौर पर कहा कि विभाग द्वारा ग्राम प्रधानों को ही दोबारा प्रशासक के तौर पर नियुक्त करने की योजना पर गंभीरता से काम जारी है। मंत्री के इस बयान से यह लगभग तय माना जा रहा है कि चुनावी प्रक्रिया पूरी होने तक मौजूदा प्रधान ही प्रशासक के रूप में गांवों का कार्यभार संभालेंगे, जिससे ग्रामीण विकास के कार्यों में कोई बाधा न आए।













