महाराष्ट्र के खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) के आयुक्त तुकाराम मुंढे एक बार फिर अपनी बेबाक कार्यशैली और सख्त फैसलों के चलते सुर्खियों में आ गए हैं। अपनी ईमानदारी और बिना किसी दबाव के कानून का पालन कराने के लिए पहचाने जाने वाले तुकाराम मुंढे ने हाल ही में नकली और मिलावटी खाद्य पदार्थों, विशेषकर एनालॉग पनीर और सिंथेटिक दूध के खिलाफ ताबड़तोड़ अभियान चलाया है। नियमों का उल्लंघन करने वाले होटलों और कारोबारियों पर उनकी कड़ी कार्रवाई ने मिलावटखोरों की नींद उड़ा दी है।
बता दें कि 21 साल के अपने प्रशासनिक करियर में तुकाराम मुंढे का अब तक 25 बार तबादला हो चुका है, लेकिन इसके बावजूद उनकी कार्यशैली और तेवर में कोई बदलाव नहीं आया है। एनालॉग पनीर पर एक साल की रोक और खाद्य सुरक्षा को लेकर उनके कड़े रुख की पूरे देश में चर्चा हो रही है। सोशल मीडिया और आम जनता के बीच यह सवाल उठ रहा है कि जो काम कानून के तहत हर अधिकारी का सामान्य कर्तव्य होना वह आज के समय में इतना असाधारण क्यों नजर आता है?
विशेषज्ञों और आम नागरिकों का मानना है कि यदि देश के हर राज्य में तुकाराम मुंढे जैसे ईमानदार और अडिग अधिकारियों की फौज तैयार हो जाए, तो मिलावटखोरी, भ्रष्टाचार और प्रशासनिक लापरवाही पर लगाम कसना आसान हो जाएगा। जनता का मानना है कि देश की स्वास्थ्य सुरक्षा और मजबूत व्यवस्था के लिए ऐसे बेखौफ अधिकारियों की देश को सबसे ज्यादा जरूरत है।












