नई दिल्ली: कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी ने केंद्र की भाजपा सरकार पर निशाना साधते हुए देश के लोकतांत्रिक ढांचे, संवैधानिक संस्थाओं और सामाजिक ताने-बाने को लेकर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि पिछले 12 वर्षों में देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था को भारी नुकसान पहुंचा है। हालांकि, अब आम लोगों को इन परिस्थितियों का एहसास होने लगा है और वे मौजूदा हालात को लेकर बेचैन हैं।
सोनिया गांधी ने उम्मीद जताई कि सरकार बदलने के बाद देश में सुशासन की वापसी होगी। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि लोकतांत्रिक संस्थाओं को दोबारा मजबूत बनाने में समय लगेगा और इसके लिए सभी राजनीतिक दलों को मिलकर गंभीर प्रयास करने होंगे।
किताब के प्रकाशन से पहले सोनिया गांधी का बड़ा इंटरव्यू
सोनिया गांधी ने ये बातें अंग्रेजी अखबार ‘द हिंदू’ को दिए एक विस्तृत इंटरव्यू में कहीं। यह इंटरव्यू उनकी आगामी किताब ‘Belonging: A Journey of Love’ के प्रकाशन से पहले सामने आया है। हार्परकॉलिन्स इंडिया से यह पुस्तक 10 नवंबर को प्रकाशित होगी।
इस किताब में सोनिया गांधी ने अपने निजी जीवन, भारत से जुड़ाव, राजनीतिक सफर, कांग्रेस पार्टी और देश के मौजूदा राजनीतिक हालात पर अपने विचार साझा किए हैं।
सरकार बदलने के बाद भी लोकतांत्रिक संस्थाओं को मजबूत करने में लगेगा समय
सोनिया गांधी ने कहा कि पिछले 12 वर्षों में देश के लोकतंत्र, संस्थाओं और सामाजिक ताने-बाने को गहरा नुकसान पहुंचा है। अब आम लोग भी इस नुकसान को समझने लगे हैं और मौजूदा परिस्थितियों को लेकर उनकी बेचैनी बढ़ रही है।
उन्होंने कहा कि सरकार बदलने के बाद भी लोकतांत्रिक व्यवस्था और संस्थाओं को पहले की तरह मजबूत और स्वस्थ बनाने में समय लगेगा। इसके लिए राजनीतिक दलों को गंभीरता से प्रयास करने होंगे।
हालांकि, उन्होंने देश के भविष्य को लेकर उम्मीद जताई। सोनिया गांधी के मुताबिक, उन्हें भरोसा है कि लोग बेहतर शासन व्यवस्था की वापसी का स्वागत करेंगे।
चुनाव आयोग और मीडिया पर नियंत्रण का लगाया आरोप
कांग्रेस की मौजूदा राजनीतिक स्थिति पर बात करते हुए सोनिया गांधी ने कहा कि केंद्र में मौजूदा सरकार आने के बाद से विपक्ष को चुनाव लड़ने के लिए समान अवसर नहीं मिल रहे हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार का सभी संस्थाओं, खासकर चुनाव आयोग पर पूरा नियंत्रण है। मुख्यधारा का मीडिया भी उसके प्रभाव में है। इसके अलावा धनबल और धर्म के इस्तेमाल से राजनीतिक मुकाबले को प्रभावित किया जा रहा है।
सोनिया गांधी ने कहा कि इन चुनौतियों के बावजूद कांग्रेस लगातार संघर्ष कर रही है। पार्टी के कार्यकर्ताओं और नेताओं ने मुश्किलों का सामना किया है, लेकिन गांव से लेकर जिला स्तर तक वे संविधान के मूल्यों की रक्षा के लिए डटे हुए हैं।
उन्होंने हाल के महीनों में चुनावों में गड़बड़ी और चुनाव चोरी होने के आरोपों का भी जिक्र किया। उनके मुताबिक, इन घटनाओं के बाद लोग पहले से ज्यादा जागरूक हुए हैं।
विपक्षी एकजुटता पर बोलीं- कांग्रेस की संभावनाएं बेहतर हो रही हैं
विपक्षी गठबंधन और कांग्रेस की राजनीतिक संभावनाओं को लेकर सोनिया गांधी ने कहा कि पार्टी समान विचारधारा वाले दलों के साथ मिलकर काम कर रही है।
उन्होंने कहा कि मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों में कांग्रेस ने जिस तरह खुद को संभाला है, वह पार्टी की मजबूती को दिखाता है। सोनिया गांधी के मुताबिक, कांग्रेस की संभावनाएं दिन-ब-दिन बेहतर हो रही हैं।
BJP और RSS के साथ कभी समझौता नहीं करेगी कांग्रेस
राजनीतिक गठबंधनों को लेकर सोनिया गांधी ने कहा कि राजनीति में कई बार समझौते करने पड़ते हैं। कुछ मौकों पर ऐसे दलों के साथ भी हाथ मिलाना पड़ता है, जिनकी विचारधारा कांग्रेस से अलग होती है। हालांकि, ऐसे फैसले उन्हें कभी सहज नहीं लगे।
उन्होंने स्पष्ट किया कि कांग्रेस ने भाजपा और आरएसएस के साथ कभी कोई समझौता नहीं किया है और भविष्य में भी ऐसा नहीं करेगी।
सोनिया गांधी ने कहा कि कांग्रेस की आधिकारिक विचारधारा धर्मनिरपेक्षता पर आधारित है। पार्टी सभी नागरिकों के संवैधानिक अधिकारों और बिना किसी डर के अपने धर्म एवं विश्वास का पालन करने की स्वतंत्रता के साथ खड़ी है।
मनमोहन सिंह के साथ टीम की तरह किया काम
2004 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस की जीत के बाद प्रधानमंत्री पद स्वीकार नहीं करने के फैसले पर सोनिया गांधी ने कहा कि उन्हें अपने इस निर्णय को लेकर कभी पछतावा नहीं हुआ।
उन्होंने बताया कि उस समय मनमोहन सिंह सरकार का नेतृत्व कर रहे थे और वह कांग्रेस पार्टी की जिम्मेदारी संभाल रही थीं। दोनों की भूमिकाएं अलग-अलग थीं और उन्होंने एक टीम की तरह काम किया।
सोनिया गांधी ने अपने इस अनुभव को सकारात्मक बताया और कहा कि मनमोहन सिंह के प्रधानमंत्री रहते हुए दोनों ने अपनी-अपनी जिम्मेदारियां निभाईं।
इंदिरा और राजीव गांधी से सीखे कर्तव्य और संवेदनशीलता के मूल्य
अपने निजी जीवन और राजनीतिक सफर पर बात करते हुए सोनिया गांधी ने कहा कि भारत आने के बाद उन्होंने इंदिरा गांधी और राजीव गांधी से बहुत कुछ सीखा।
उन्होंने दोनों के साहस, संवेदनशीलता, धर्मनिरपेक्ष और लोकतांत्रिक भारत के प्रति प्रतिबद्धता तथा कर्तव्य को सर्वोपरि रखने के भाव का जिक्र किया।
सोनिया गांधी ने कहा कि इटली में पली-बढ़ी होने के बावजूद परिवार और दोस्तों के प्रति निष्ठा, दूसरों के प्रति संवेदनशीलता और जिम्मेदारी जैसे मूल्य आज भी उनके व्यक्तित्व का हिस्सा हैं।
आपातकाल को बताया स्वतंत्र भारत के इतिहास का काला अध्याय
सोनिया गांधी ने 1975 से 1977 के बीच लगाए गए आपातकाल को स्वतंत्र भारत के इतिहास का काला अध्याय बताया। उन्होंने स्वीकार किया कि उस दौरान लोकतांत्रिक अधिकारों पर रोक लगी थी और बंदी प्रत्यक्षीकरण का अधिकार भी निलंबित कर दिया गया था।
उन्होंने कहा कि बाद में इंदिरा गांधी ने खुद हालात को समझते हुए मार्च 1977 में चुनाव कराने का फैसला किया था। साथ ही आपातकाल के दौरान हुई ज्यादतियों पर खेद जताते हुए माफी भी मांगी थी।
सोनिया गांधी के इस इंटरव्यू में देश की मौजूदा राजनीति, कांग्रेस की चुनौतियों, विपक्षी एकजुटता और लोकतांत्रिक संस्थाओं की स्थिति के साथ-साथ उनके निजी जीवन से जुड़े कई महत्वपूर्ण पहलुओं पर भी चर्चा हुई है।



