Lucknow: इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने नगर निगम से जुड़े एक मामले में सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने स्पष्ट कहा है कि यदि पार्षद के रूप में निर्वाचित घोषित किए गए ललित तिवारी को शपथ नहीं दिलाई गई, तो लखनऊ के मेयर, डीएम और नगर आयुक्त को 13 मई 2026 को व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित होना होगा।
मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति आलोक माथुर और न्यायमूर्ति अमिताभ कुमार राय की खंडपीठ ने की। याचिकाकर्ता ललित तिवारी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता गौरव मेहरोत्रा के साथ अधिवक्ता नदीम मुर्तज़ा और उत्सव मिश्रा ने पक्ष रखा।
याचिका में कहा गया कि जिला जज द्वारा 19 दिसंबर 2025 को ललित तिवारी को निर्वाचित घोषित किए जाने के बावजूद पांच महीने बीत जाने के बाद भी उन्हें उत्तर प्रदेश नगर निगम अधिनियम, 1959 की धारा 85 के तहत शपथ नहीं दिलाई गई।
कोर्ट ने आदेश में उल्लेख किया कि डीएम लखनऊ पहले ही 23 जनवरी 2026 और 10 फरवरी 2026 को नगर आयुक्त को चुनाव न्यायाधिकरण के फैसले की सूचना दे चुके थे। राज्य सरकार ने भी 4 फरवरी 2026 को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए थे। इसके बावजूद शपथ ग्रहण न होना गंभीर विषय माना गया।
हाईकोर्ट ने कहा कि यदि अगली तारीख तक शपथ नहीं दिलाई जाती, तो मेयर, डीएम और नगर आयुक्त अदालत में उपस्थित होकर जवाब दें कि आदेश के बावजूद कार्रवाई क्यों नहीं हुई।



