डेस्क : आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में खानपान की अनियमितता, शारीरिक गतिविधियों की कमी और नींद पूरी न होने जैसी आदतें सेहत पर असर डाल सकती हैं। बार-बार प्यास लगना, ज्यादा भूख महसूस होना, थकान और सिरदर्द जैसी परेशानियां भी शरीर में किसी समस्या का संकेत हो सकती हैं। हालांकि, इन लक्षणों का मतलब यह नहीं है कि हर व्यक्ति को इंसुलिन रेजिस्टेंस या डायबिटीज ही है। इनकी वजह जानने के लिए सही चिकित्सकीय जांच जरूरी है।
टाइप-2 डायबिटीज के जोखिम को कम करने के लिए केवल चीनी छोड़ देना या खाने में तेल की मात्रा घटाना पर्याप्त नहीं है। इसके लिए संतुलित आहार, नियमित व्यायाम, पर्याप्त नींद और वजन को नियंत्रित रखने जैसे कई पहलुओं पर ध्यान देना जरूरी है।
क्या है इंसुलिन रेजिस्टेंस?
इंसुलिन एक हार्मोन है, जो खून में मौजूद ग्लूकोज को शरीर की कोशिकाओं तक पहुंचाने में मदद करता है। जब शरीर की कोशिकाएं इंसुलिन के प्रति कम संवेदनशील हो जाती हैं, तो इस स्थिति को इंसुलिन रेजिस्टेंस कहा जाता है। ऐसी स्थिति में शरीर को ब्लड शुगर नियंत्रित रखने के लिए ज्यादा इंसुलिन बनाना पड़ सकता है। समय के साथ कुछ लोगों में टाइप-2 डायबिटीज का खतरा बढ़ सकता है।
इसलिए लगातार थकान, ज्यादा प्यास या बार-बार पेशाब आने जैसे लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। डॉक्टर की सलाह से ब्लड ग्लूकोज और HbA1c जैसी जांच कराई जा सकती है। केवल लक्षणों या किसी एक इंसुलिन टेस्ट के आधार पर खुद से बीमारी का निष्कर्ष निकालना उचित नहीं है।
डाइट में इन बदलावों से मिल सकती है मदद
खाने की थाली में कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, फाइबर और स्वस्थ वसा का संतुलन होना चाहिए। सफेद ब्रेड, मैदा, पेस्ट्री, मीठे पेय और अत्यधिक प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थों की जगह साबुत अनाज, दालें, सब्जियां और फाइबर से भरपूर विकल्प अपनाना बेहतर हो सकता है।
प्रोटीन के लिए दाल, चना, राजमा, दही, पनीर, अंडे या अन्य उपयुक्त स्रोत शामिल किए जा सकते हैं। वहीं, बादाम, अखरोट, बीज और सीमित मात्रा में इस्तेमाल किए गए उपयुक्त तेल से स्वस्थ वसा मिल सकती है। भोजन की मात्रा और पोषण संबंधी जरूरतें व्यक्ति की उम्र, वजन, गतिविधि और स्वास्थ्य के अनुसार अलग हो सकती हैं।
मोटापा और फैटी लिवर को न करें नजरअंदाज
पेट के आसपास अतिरिक्त चर्बी और फैटी लिवर की समस्या इंसुलिन रेजिस्टेंस के जोखिम से जुड़ी हो सकती है। इसलिए नियमित शारीरिक गतिविधि और जरूरत के अनुसार वजन कम करना मेटाबॉलिक सेहत के लिए फायदेमंद हो सकता है। सामान्य वजन होने पर भी मांसपेशियों की ताकत और शारीरिक सक्रियता पर ध्यान देना जरूरी है।
तेल का इस्तेमाल करते समय बरतें सावधानी
खाना पकाने के तेल को बार-बार गर्म करके तलने के लिए इस्तेमाल करने से बचना चाहिए। बार-बार गर्म करने पर तेल की गुणवत्ता खराब हो सकती है और नुकसानदेह यौगिक बन सकते हैं। इसलिए तेल का चयन, उसकी मात्रा और इस्तेमाल करने का तरीका महत्वपूर्ण है। हालांकि, किसी एक तेल को पूरी तरह बंद कर देना हर व्यक्ति के लिए जरूरी नहीं है।
डायबिटीज से बचाव के लिए क्या करें?
रोजाना नियमित समय पर भोजन करें, पर्याप्त नींद लें और अपनी क्षमता के अनुसार पैदल चलने या अन्य व्यायाम को दिनचर्या का हिस्सा बनाएं। लंबे समय तक बैठे रहने से बचें और जरूरत के मुताबिक वजन नियंत्रित रखें। यदि प्यास और भूख लगातार बढ़ रही है, थकान बनी रहती है या बार-बार पेशाब आता है, तो डॉक्टर से परामर्श लें।
डायबिटीज के जोखिम को कम करने के लिए केवल शुगर कम करना नहीं, बल्कि संपूर्ण जीवनशैली में सुधार करना जरूरी है। समय पर जांच, संतुलित खानपान और नियमित गतिविधि बेहतर मेटाबॉलिक स्वास्थ्य की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं।
स्वास्थ्य संबंधी नोट: यह जानकारी सामान्य जागरूकता के लिए है। लक्षण बने रहने पर चिकित्सकीय सलाह लें और अपनी दवाएं या निर्धारित डाइट डॉक्टर से पूछे बिना न बदलें।















