केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने गुरुवार को मेघालय की राजधानी शिलांग में नॉर्थ ईस्टर्न काउंसिल की 73वीं प्लेनरी मीटिंग की अध्यक्षता की। इस उच्चस्तरीय बैठक में पूर्वोत्तर राज्यों के विकास, ढांचागत बुनियादी ढांचे को मजबूत करने और क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर विस्तृत चर्चा की गई।
यह बैठक पूर्वोत्तर क्षेत्र के सुनहरे भविष्य और आत्मनिर्भर भारत के विजन को गति देने की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है।
देश के शीर्ष राजनेता और वरिष्ठ अधिकारी हुए शामिल
इस 73वें प्लेनरी सेशन में केंद्र सरकार और पूर्वोत्तर के सभी आठ राज्यों के प्रमुख नीति-निर्माता एक मंच पर नजर आए।
बता दें, गृह मंत्री अमित शाह के साथ केंद्रीय पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया और केंद्रीय DoNER राज्य मंत्री सुकांत मजूमदार शामिल हुए। केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन और DoNER सचिव संजय जाजू ने भी बैठक में हिस्सा लिया। मेजबान मेघालय के गवर्नर सीएच विजय शंकर और मुख्यमंत्री कोनराड के संगमा के अलावा अरुणाचल प्रदेश, असम, मणिपुर, त्रिपुरा, मिजोरम, नागालैंड और सिक्किम के गवर्नरों व मुख्यमंत्रियों सहित कई वरिष्ठ अधिकारियों और गणमान्य लोगों ने शिरकत की।
पूर्वोत्तर के विकास के लिए ‘महत्वपूर्ण मील का पत्थर’
बैठक में शामिल होने पहुंचे पूर्वोत्तर राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने इस सत्र के महत्व को रेखांकित किया:
प्रेम सिंह तमांग (मुख्यमंत्री, सिक्किम): “यह एक बेहद जरूरी और महत्वपूर्ण बैठक है। इस प्लेनरी सेशन के जरिए नॉर्थ ईस्ट रीजन के समग्र विकास के लिए कई बड़े प्रोजेक्ट्स और स्कीम्स की रूपरेखा तय की जाती है।”
पेमा खांडू (मुख्यमंत्री, अरुणाचल प्रदेश): “अपने गठन के बाद से ही नॉर्थ ईस्टर्न काउंसिल ने पूर्वोत्तर के विकास में एक मील का पत्थर की भूमिका निभाई है। आज सभी आठ राज्य ‘विकास 2047‘ के बड़े लक्ष्य को हासिल करने के लिए अपने-अपने तरीके से प्लानिंग प्रोसेस (योजना प्रक्रिया) को मजबूत कर रहे हैं। DoNER मंत्रालय और NEC इसमें बहुत बड़ा योगदान दे रहे हैं।”
क्या है नॉर्थ ईस्टर्न काउंसिल?
नॉर्थ ईस्टर्न काउंसिल एक्ट, 1971 के तहत गठित एनईसी भारत के पूर्वोत्तर क्षेत्र के लिए सबसे बड़ी रीजनल प्लानिंग बॉडी के रूप में काम करती है।
यह परिषद पूर्वोत्तर के आठ राज्यों (अरुणाचल प्रदेश, असम, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नागालैंड, सिक्किम और त्रिपुरा) के बीच आपसी और समन्वित विकास को बढ़ावा देने के साथ-साथ देश में सहकारी संघवाद के ढांचे को मजबूत करने में एक बेहद अहम और निर्णायक भूमिका निभाती है। इस प्लेनरी मीटिंग के जरिए आने वाले समय में नॉर्थ ईस्ट में कनेक्टिविटी, पर्यटन, रोजगार और सुरक्षा के मोर्चे पर बड़े नीतिगत फैसले देखने को मिलेंगे।












