डेस्क : शरीर में सूजन होना कई बार सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा होता है। चोट लगने या संक्रमण होने पर शरीर का इम्यून सिस्टम सूजन के जरिए बचाव करता है। आमतौर पर बीमारी या चोट ठीक होने के साथ सूजन भी खत्म हो जाती है। लेकिन जब शरीर में लंबे समय तक हल्के स्तर की सूजन बनी रहती है, तो यह गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का संकेत हो सकती है। मेडिकल भाषा में इसे क्रॉनिक इन्फ्लेमेशन (Chronic Inflammation) कहा जाता है।
इस स्थिति में शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली लगातार सक्रिय बनी रहती है। समय के साथ इसका असर स्वस्थ कोशिकाओं और शरीर के अलग-अलग अंगों पर पड़ सकता है। सितंबर 2026 में सामने आए इम्पीरियल कॉलेज लंदन के शोध में भी लंबे समय तक रहने वाली सूजन और हृदय संबंधी बीमारियों के बीच संबंध को लेकर महत्वपूर्ण जानकारी सामने आई है। शोध के मुताबिक, अधिक सूजन वाले लोगों में हार्ट अटैक और स्ट्रोक का जोखिम कम सूजन वाले लोगों की तुलना में 43 प्रतिशत तक अधिक पाया गया। ऐसे में समझना जरूरी है कि क्रॉनिक इन्फ्लेमेशन क्या है और इसका शरीर पर क्या असर पड़ सकता है।
क्या होती है क्रॉनिक इन्फ्लेमेशन की समस्या?
क्रॉनिक इन्फ्लेमेशन ऐसी स्थिति है, जिसमें शरीर का इम्यून सिस्टम लंबे समय तक सक्रिय रहता है। सामान्य सूजन के विपरीत यह समस्या कई बार बिना किसी स्पष्ट लक्षण के शरीर के अंदर बनी रहती है। व्यक्ति को इसका अंदाजा भी नहीं लग पाता, जबकि धीरे-धीरे इसका प्रभाव स्वास्थ्य पर पड़ सकता है।
मोटापा, धूम्रपान, असंतुलित खानपान, शारीरिक गतिविधियों की कमी और लगातार तनाव इसके जोखिम से जुड़े कारक हो सकते हैं। इसके अलावा ऑटोइम्यून बीमारियां और लंबे समय तक रहने वाले संक्रमण भी शरीर में सूजन को बढ़ा सकते हैं।
हार्ट अटैक और स्ट्रोक का जोखिम बढ़ने की आशंका
लंबे समय तक शरीर में सूजन बने रहने का सबसे गंभीर असर हृदय और रक्त वाहिकाओं पर पड़ सकता है। शोध में अधिक सूजन वाले लोगों के दिल की संरचना में कुछ बदलाव देखे गए। इनमें हृदय की दीवारों का मोटा होना, चैंबर का आकार छोटा होना और खून भरने की क्षमता प्रभावित होना शामिल है।
इसके अलावा क्रॉनिक इन्फ्लेमेशन रक्त वाहिकाओं में प्लाक जमा होने की प्रक्रिया यानी एथेरोस्क्लेरोसिस को बढ़ावा दे सकती है। इससे रक्त का प्रवाह प्रभावित होता है और हार्ट अटैक तथा स्ट्रोक जैसी गंभीर समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है।
टाइप-2 डायबिटीज का भी बढ़ सकता है खतरा
लगातार बनी रहने वाली सूजन शरीर में इंसुलिन के सामान्य कामकाज को प्रभावित कर सकती है। इससे इंसुलिन रेजिस्टेंस की समस्या पैदा होने की आशंका रहती है। ऐसी स्थिति में शरीर के लिए ब्लड शुगर को नियंत्रित करना मुश्किल हो सकता है। लंबे समय तक इंसुलिन रेजिस्टेंस बने रहने पर टाइप-2 डायबिटीज का जोखिम बढ़ सकता है। इसलिए शरीर में सूजन से जुड़े जोखिमों को नजरअंदाज करना उचित नहीं है।
कुछ प्रकार के कैंसर से भी जुड़ा है संबंध
क्रॉनिक इन्फ्लेमेशन का संबंध कुछ प्रकार के कैंसर के विकास से भी देखा गया है। शरीर में लंबे समय तक रहने वाली सूजन कोशिकाओं के सामान्य कामकाज को प्रभावित कर सकती है। खास तौर पर आंतों में लंबे समय तक रहने वाली सूजन संबंधी बीमारियों में कोलोरेक्टल कैंसर का जोखिम बढ़ सकता है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि शरीर में सूजन होने वाला हर व्यक्ति कैंसर की चपेट में आएगा।
लाइफस्टाइल में बदलाव से कम किया जा सकता है जोखिम
लंबे समय तक रहने वाली सूजन से जुड़े जोखिमों को कम करने में स्वस्थ जीवनशैली महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इसके लिए रोजाना शारीरिक गतिविधियों को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाना चाहिए।
रोजाना लगभग 30 मिनट टहलने या अपनी क्षमता के अनुसार व्यायाम करने की आदत डालें।
- भोजन में हरी सब्जियां, मौसमी फल, दालें और साबुत अनाज शामिल करें।
- संतुलित और पौष्टिक आहार को प्राथमिकता दें।
- ज्यादा चीनी, जंक फूड और अत्यधिक प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थों का सेवन सीमित रखें।
- धूम्रपान से दूरी बनाएं।
- पर्याप्त नींद लें और तनाव को नियंत्रित रखने की कोशिश करें।
कब डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है?
अगर शरीर में लंबे समय तक सूजन बनी रहती है या इसके साथ लगातार थकान, जोड़ों में दर्द अथवा अन्य परेशानी महसूस होती है, तो डॉक्टर से परामर्श लेना चाहिए। केवल लक्षणों के आधार पर क्रॉनिक इन्फ्लेमेशन की पुष्टि नहीं की जा सकती। इसके लिए डॉक्टर जरूरत के मुताबिक जांच की सलाह दे सकते हैं।
Disclaimer: यह लेख सामान्य स्वास्थ्य संबंधी जानकारी के उद्देश्य से तैयार किया गया है। इसे मेडिकल सलाह या किसी बीमारी के निदान का विकल्प न समझें। स्वास्थ्य संबंधी परेशानी होने पर विशेषज्ञ डॉक्टर से सलाह लें।















