पश्चिम एशिया में जारी भीषण तनाव और इजराइली सैन्य अभियानों के बीच कूटनीतिक गलियारों से एक बेहद बड़ी खबर सामने आ रही है। ईरान ने लेबनान और पूरे क्षेत्र के ताजा हालातों पर अपना रुख दोहराते हुए मंगलवार को साफ किया कि अमेरिका को “सभी मोर्चों पर” लड़ाई खत्म करने के अपने वादों को हर हाल में पूरा करना होगा। ईरानी सरकारी मीडिया के अनुसार, विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता एस्माईल बघाई ने एक प्रेस ब्रीफिंग में स्पष्ट किया कि वाशिंगटन ने लेबनान में युद्ध खत्म करने को लेकर जो स्पष्ट प्रतिबद्धताएं जताई हैं, वे दोनों देशों के बीच आगे की किसी भी सहमति के लिए सबसे बुनियादी शर्त हैं।
14-पॉइंट MoU और स्विट्जरलैंड की गोपनीय बातचीत
बता दें, प्रवक्ता बघाई ने बताया कि पश्चिम एशिया में दुश्मनी और सैन्य टकराव को पूरी तरह समाप्त करने के उद्देश्य से अमेरिका और ईरान के बीच स्विट्जरलैंड में शुरुआती दौर की तकनीकी बातचीत पूरी हो चुकी है। इसके तहत दोनों पक्षों ने एक ’14-पॉइंट मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग’ (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं। इस एमओयू के आर्टिकल 1 के मुताबिक, लेबनान में इजराइली हमलों और सैन्य अभियानों को रोकना सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसके लिए एक विशेष ‘डी-कॉन्फ्लिक्टेशन सेल’ बनाने पर भी सहमति बनी है, जिसमें मध्यस्थों के साथ-साथ लेबनान भी शामिल रहेगा। हालांकि, इजराइल ने दक्षिणी लेबनान के कब्जे वाले इलाकों से पीछे हटने से साफ इनकार किया है।
कतर में फंसा $6 बिलियन का ईरानी फंड और दोहा बैठक
ईरानी प्रवक्ता ने साफ किया कि आने वाले दिनों में तेहरान का अमेरिकी अधिकारियों के साथ किसी भी राजनीतिक स्तर की बैठक का कोई प्लान नहीं है। दोहा में होने वाली आगामी बैठक विशुद्ध रूप से एक ‘तकनीकी वार्ता’ है, जिसका उद्देश्य पहले से तय हो चुके नियमों को लागू करना है।
इस बैठक का एक मुख्य एजेंडा कतर के पास फ्रीज (रोके गए) पड़े ईरान के 6 अरब अमेरिकी डॉलर ($6 Billion) के फंड को रिलीज कराना है। इस बीच, कतर के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता माजिद मोहम्मद अल-अंसारी ने भी पुष्टि की है कि यह राशि अभी तक तेहरान को ट्रांसफर नहीं की गई है। कतरी प्रशासन के अनुसार, इस विशाल फंड को रिलीज किया जाना दोनों देशों के बीच चल रही कूटनीतिक और तकनीकी बातचीत की प्रगति पर निर्भर करेगा।



