इलाहाबाद हाईकोर्ट से कांग्रेस के दिग्गज नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के लिए बड़ी राहत की खबर सामने आई है। अदालत ने उस याचिका को सिरे से खारिज कर दिया है, जिसमें राहुल गांधी के एक पुराने विवादित बयान को लेकर उनके खिलाफ मुकदमा (FIR) दर्ज करने की मांग की गई थी।

क्या था पूरा मामला?

यह कानूनी विवाद राहुल गांधी के उस बयान से जुड़ा था, जिसमें उन्होंने राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता को परिभाषित करते हुए कहा था कि देश में वर्तमान “लड़ाई भाजपा-आरएसएस और इंडियन स्टेट (भारतीय राज्य) के बीच है।” इस टिप्पणी को लेकर विपक्ष और कुछ संगठनों ने कड़ी आपत्ति जताई थी। याचिकाकर्ता का तर्क था कि यह बयान संवैधानिक संस्थाओं और देश की छवि के खिलाफ है, इसलिए इस पर आपराधिक कार्रवाई होनी चाहिए।

हाईकोर्ट का रुख

मामले की सुनवाई हाईकोर्ट की सिंगल बेंच में हुई। अदालत ने याचिका में दिए गए तर्कों और तथ्यों का बारीकी से अध्ययन करने के बाद इसे सुनवाई के योग्य नहीं पाया। कोर्ट ने याचिका को खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि इस मामले में राहुल गांधी के खिलाफ FIR दर्ज करने का कोई पर्याप्त आधार नहीं बनता है।

राजनैतिक हलकों में चर्चा

हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद फिलहाल राहुल गांधी पर इस विशेष टिप्पणी को लेकर चल रही कानूनी तलवार हट गई है। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि अभिव्यक्ति की आजादी और राजनीतिक बयानों की मर्यादा के बीच इस फैसले को काफी अहम माना जा रहा है। इस राहत के बाद कांग्रेस खेमे में खुशी की लहर है, जबकि याचिकाकर्ता पक्ष के पास अब उच्च बेंच में अपील करने का विकल्प शेष है।

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