पाकिस्तान के अवैध कब्जे वाले कश्मीर में स्थिति बेहद विस्फोटक हो गई है। रावलकोट में पाकिस्तानी सुरक्षा बलों द्वारा आम नागरिकों पर की गई अंधाधुंध फायरिंग में 6 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई है। मरने वालों में जाहिद मुगल, जफर मुगल, अर्सलान अकबर और वाजिद हयात जैसे स्थानीय नागरिक शामिल हैं। इस बर्बर कार्रवाई के बाद पूरे इलाके में इस्लामाबाद के खिलाफ भारी रोष है।
अंधेरे में डूबा PoK, मदद के लिए भारत की ओर टकटकी
पाकिस्तानी सेना के दमन से त्रस्त PoK की जनता अब पूरी तरह से दुनिया से कट चुकी है। इलाके में लंबे समय से जारी इंटरनेट शटडाउन के कारण करीब 40 लाख लोग बाहरी दुनिया से संपर्क नहीं कर पा रहे हैं। इस संकट के बीच, स्थानीय लोगों ने एक अभूतपूर्व कदम उठाते हुए भारत से दखल देने की अपील की है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि पुंछ और डोडा सेक्टर के जरिए नियंत्रण रेखा (LoC) खोली जाए, ताकि मानवीय सहायता पहुंचाई जा सके और लोगों की जान बचाई जा सके।
वॉशिंगटन तक गूंजी आवाज
PoK का दर्द सिर्फ स्थानीय गलियों तक सीमित नहीं रहा। अमेरिका के वॉशिंगटन में व्हाइट हाउस के बाहर इकट्ठा हुए PoK समुदाय के लोगों ने दुनिया का ध्यान इस मानवीय संकट की ओर खींचा। प्रदर्शनकारियों ने मांग की है कि पाकिस्तानी सेना को तुरंत नागरिक इलाकों से हटाया जाए और निर्दोषों पर हो रहे अत्याचारों को रोका जाए।
भारत का सख्त रुख
इस पूरे मामले पर भारत सरकार ने कड़ा रुख अपनाया है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने स्पष्ट किया कि रावलकोट में हो रही हिंसा कोई अचानक घटी घटना नहीं, बल्कि पाकिस्तान द्वारा दशकों से किए जा रहे ‘व्यवस्थित शोषण’ का परिणाम है। भारत ने कहा कि PoK में लोग अपने मौलिक अधिकारों से वंचित हैं और पाकिस्तानी सेना का प्रशासनिक दमन वहां की जनता का जीना दूभर कर चुका है।
पाकिस्तान के अवैध कब्जे वाले इस इलाके में बढ़ता असंतोष और सुरक्षा बलों की क्रूरता यह संकेत दे रही है कि वहां के हालात अब इस्लामाबाद के नियंत्रण से बाहर होते जा रहे हैं। वैश्विक समुदाय और भारत की नजरें अब इस बात पर टिकी हैं कि क्या यह दमनकारी नीति PoK को एक बड़े जन-विद्रोह की ओर ले जाएगी?



