लखनऊ: उत्तर प्रदेश की विधान परिषद की मतदाता सूची में कथित गड़बड़ी को लेकर आम आदमी पार्टी (AAP) के सांसद संजय सिंह और उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO UP) के बीच बयानबाजी चर्चा में है। वोटर लिस्ट में ‘राम ने यादव को मारा’ जैसे नाम सामने आने के बाद संजय सिंह ने जातीय भेदभाव को लेकर सवाल उठाए थे। अब CEO UP के आधिकारिक X हैंडल से इस मामले पर जवाब दिया गया है, जिसकी भाषा और शैली चर्चा का विषय बन गई है।
‘राम ने शर्मा को भी मारा’, CEO UP का जवाब
CEO UP के आधिकारिक X हैंडल पर किए गए पोस्ट में लिखा गया कि हालिया विधान परिषद की वोटर लिस्ट में ‘राम ने शर्मा को मारा’ नाम की प्रविष्टि भी मौजूद है। पोस्ट में कहा गया कि कंप्यूटर और सॉफ्टवेयर जातिवादी नहीं होते हैं।
जवाब में आगे लिखा गया कि विभाग की ओर से गलती स्वीकार की जाती है, लेकिन गलती होने के दौरान भी जाति के आधार पर भेदभाव नहीं हुआ। पोस्ट में धार्मिक संदर्भ का इस्तेमाल करते हुए यह भी कहा गया कि भगवान का शुक्र है कि राम ने किसी अल्पसंख्यक को नहीं मारा, वरना जातिवादी होने के साथ-साथ सांप्रदायिक होने का आरोप भी लगता।
संजय सिंह ने उठाया था जातीय भेदभाव का सवाल
दरअसल, उत्तर प्रदेश की विधान परिषद की मतदाता सूची में ‘राम ने यादव को मारा’ और ‘पिता मूर्ख चंद यादव’ जैसी कथित गड़बड़ियों को लेकर सवाल उठाए गए थे। AAP सांसद संजय सिंह ने इस मामले में जातीय एंगल से सवाल उठाते हुए मतदाता सूची में दर्ज नामों की प्रकृति पर आपत्ति जताई थी।
इसके बाद CEO UP की ओर से ‘राम ने शर्मा को मारा’ वाली प्रविष्टि का हवाला देते हुए जवाब दिया गया। इस प्रतिक्रिया के जरिए विभाग ने यह स्पष्ट करने की कोशिश की कि कथित गड़बड़ी केवल किसी एक जाति तक सीमित नहीं थी।
संवैधानिक संस्था की भाषा पर भी चर्चा
इस मामले में विवाद केवल मतदाता सूची में कथित गड़बड़ी तक सीमित नहीं रहा। CEO UP के आधिकारिक हैंडल से इस्तेमाल की गई भाषा भी चर्चा में आ गई है। धार्मिक संदर्भ और तंज के अंदाज में दिए गए जवाब को लेकर सवाल उठ रहे हैं कि क्या एक संवैधानिक संस्था के आधिकारिक संचार में इस तरह की भाषा उपयुक्त है। फिलहाल, इस पूरे मामले में मतदाता सूची की कथित त्रुटियों और उन्हें सुधारने की प्रक्रिया को लेकर आधिकारिक स्पष्टीकरण महत्वपूर्ण माना जा रहा है।













