अयोध्या में हुए रामधन चोरी के मामले में अब वाराणसी का सनसनीखेज कनेक्शन सामने आया है। जांच में खुलासा हुआ है कि राम मंदिर में तैनात ‘सैनिक सिक्योरिटी सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड’ द्वारा भेजे गए कर्मचारियों की भूमिका इस चोरी में बेहद संदिग्ध है। एजेंसी ने हाउस कीपिंग के नाम पर अयोध्या में 22 कर्मचारी भेजे थे, जिनमें से 6 को अब तक गिरफ्तार किया जा चुका है।
चौंकाने वाली बात यह है कि ये सभी 22 कर्मचारी अयोध्या ब्रांच के चीफ मैनेजर की सिफारिश पर रखे गए थे। मैनेजर ने बाकायदा लिखित में इन 22 नामों की सूची एजेंसी को भेजी थी। सबसे गंभीर लापरवाही यह रही कि सैनिक सिक्योरिटी एजेंसी ने बिना किसी पुलिस सत्यापन (Verification) के इन सभी को सीधे राम मंदिर परिसर में भर्ती कर दिया। हालांकि इनका काम हाउस कीपिंग का था, लेकिन गिरफ्तार हुए आरोपी चोरी-छिपे रामधन गिनने का काम कर रहे थे।
जब इस मामले में एजेंसी के मालिक से सवाल किया गया, तो उन्होंने पल्ला झाड़ते हुए कहा कि उन्हें नहीं पता कि उनके कर्मचारी वहां क्या कर रहे थे। उन्होंने तर्क दिया कि कर्मचारियों से काम करवाना बैंक और प्रशासन की जिम्मेदारी थी। वहीं, SIT ने अब एजेंसी के सुपरवाइजर से भी कड़ी पूछताछ की है। 26 साल पुरानी यह सुरक्षा एजेंसी देश के 8 राज्यों में सक्रिय है और कैश लॉजिस्टिक जैसे संवेदनशील काम करती है। अब सवाल यह है कि इतनी बड़ी कंपनी ने बिना वेरिफिकेशन के लोगों को इतने पवित्र और संवेदनशील स्थान पर कैसे भेजा? क्या यह महज लापरवाही है या किसी बड़े संगठित गिरोह का हिस्सा? जांच एजेंसियां अब उन संबंधों को खंगाल रही हैं जिन्होंने इन कर्मचारियों को रामधन तक पहुंच दिलाई।















