नई दिल्ली/भोपाल : देश की राजधानी दिल्ली से इस वक्त की एक बहुत बड़ी और देश की सियासत को प्रभावित करने वाली कानूनी खबर सामने आ रही है। सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश से कांग्रेस की राज्यसभा प्रत्याशी मीनाक्षी नटराजन को एक बेहद बड़ा झटका दिया है। अदालत ने उनके नामांकन पत्र (Nomination Paper) को रद्द किए जाने के खिलाफ दायर की गई याचिका को पूरी तरह से खारिज कर दिया है। माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने अपने आदेश में साफ कहा है कि चुनाव प्रक्रिया के बीच में अदालत इसमें हस्तक्षेप नहीं करेगी और रिटर्निंग ऑफिसर (RO) द्वारा नामांकन रद्द करने का दिया गया पिछला आदेश पूरी तरह बरकरार रहेगा।
दिल्ली
➡मीनाक्षी नटराजन को सुप्रीम कोर्ट से झटका
➡नामांकन रद्द किए जाने के खिलाफ याचिका खारिज
➡MP से राज्यसभा चुनाव के लिए नामांकन रद्द
➡मीनाक्षी नटराजन ने SC में याचिका दाखिल की थी
➡रिटर्निंग अफसर का आदेश बरकरार रहेगा- SC#Delhi #SupremeCourt #MeenakshiNatarajan pic.twitter.com/qor6Z2NhYQ— भारत समाचार | Bharat Samachar (@bstvlive) June 12, 2026
पूरा विवाद मीनाक्षी नटराजन के चुनावी हलफनामे (Affidavit) में कथित रूप से एक कानूनी मामले की जानकारी छिपाने को लेकर शुरू हुआ था। भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेताओं और उम्मीदवार ने रिटर्निंग ऑफिसर के सामने आधिकारिक आपत्ति दर्ज कराई थी कि मीनाक्षी नटराजन ने तेलंगाना (हैदराबाद) की एक अदालत में लंबित एक निजी शिकायत और अदालती नोटिस से जुड़े तथ्यों को अपने नामांकन पत्र के फॉर्म 26 में छुपाया है। रिटर्निंग ऑफिसर ने इस शिकायत को सही पाते हुए मीनाक्षी नटराजन का नामांकन पत्र खारिज कर दिया था।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा- चुनावी प्रक्रिया शुरू होने के बाद दखल नहीं
इस फैसले के खिलाफ कांग्रेस और मीनाक्षी नटराजन के वकीलों ने देश की सबसे बड़ी अदालत (सुप्रीम कोर्ट) का दरवाजा खटखटाया था। उनके वरिष्ठ वकीलों ने दलील दी कि संबंधित मामला कोई गंभीर आपराधिक एफआईआर (FIR) नहीं है, बल्कि केवल एक कोर्ट नोटिस था, जिसे हलफनामे में बताना अनिवार्य नहीं था। उन्होंने दलील दी कि नामांकन रद्द करना लोकतंत्र और नियमों के खिलाफ है।
हालांकि, सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने इन तर्कों को स्वीकार नहीं किया। कोर्ट ने ‘अशोक कुमार केस’ के स्थापित कानूनी सिद्धांतों का हवाला देते हुए स्पष्ट किया कि एक बार जब चुनाव की अधिसूचना जारी हो जाती है और चुनावी प्रक्रिया शुरू हो जाती है, तो अदालतें आमतौर पर इसमें बीच में हस्तक्षेप नहीं करती हैं। नटराजन के पास अब चुनाव संपन्न होने के बाद केवल ‘इलेक्शन पिटीशन’ (चुनाव याचिका) दायर करने का ही विकल्प बचता है। इस फैसले के बाद मध्य प्रदेश की तीसरी राज्यसभा सीट पर कांग्रेस की दावेदारी पूरी तरह खत्म हो गई है और भाजपा उम्मीदवारों की राह बेहद आसान हो गई है।














