लखनऊ। उत्तर प्रदेश में बिजली कंपनियों ने एक झटके में उन 10 लाख गरीब उपभोक्ताओं को भी लाइफ लाइन श्रेणी से बाहर कर दिया है, जिनकी पूरे वित्तीय वर्ष में कुल बिजली खपत 1200 यूनिट से भी कम रही है। उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद ने इसे नियामक आयोग के टैरिफ आदेश का सीधा उल्लंघन बताते हुए सभी प्रभावित उपभोक्ताओं को फिर से लाइफ लाइन श्रेणी में शामिल कराने की मांग की है।
क्या है पूरा मामला?
परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने बताया कि पिछले दो वर्षों से विद्युत नियामक आयोग के टैरिफ आदेश में साफ व्यवस्था है कि किसी भी लाइफ लाइन उपभोक्ता को एक वित्तीय वर्ष में 1200 यूनिट से अधिक बिजली खपत होने पर ही इस श्रेणी से बाहर किया जा सकता है। इसके बावजूद, बिजली कंपनियों ने महज तीन महीने लगातार खपत अधिक रहने के आधार पर बड़ी संख्या में उपभोक्ताओं को सामान्य घरेलू श्रेणी में डाल दिया, जो कि आदेश का उल्लंघन है।
47 लाख में से 10 लाख लाइफ लाइन उपभोक्ता प्रभावित
अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि यदि किसी उपभोक्ता की पूरे वित्तीय वर्ष की कुल बिजली खपत मात्र 1000 यूनिट है, लेकिन किन्हीं कारणों से तीन महीने उसका विद्युत भार बढ़ जाता है, तो उसे दो किलोवाट की श्रेणी में डालकर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डालना पूरी तरह गलत है। बिजली कंपनियों ने हाल ही में जिन 47 लाख उपभोक्ताओं का एकदम से विद्युत भार बढ़ाया है, उनमें से लगभग 10 लाख ऐसे लाइफ लाइन उपभोक्ता हैं जिनकी पूरे साल की खपत 1200 यूनिट से कम रही। प्रदेश में कुल लगभग 1.78 करोड़ लाइफ लाइन श्रेणी के उपभोक्ता हैं और परिषद ने आयोग से इस विसंगति को तत्काल समाप्त कर गरीब उपभोक्ताओं को राहत देने की अपील की है।












