हर आम इंसान का यह सपना होता है कि उसकी अपनी एक छत हो, एक आशियाना हो जहाँ वह अपने परिवार के साथ सुखद जीवन बिता सके। लेकिन उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद से एक ऐसा सनसनीखेज मामला सामने आया है, जिसने घर खरीदने का सपना देखने वाले लोगों के अरमानों पर पानी फेर दिया है। मुरादाबाद की मायानगर आवास समिति में फ्लैटों के आवंटन में एक बहुत बड़ा घोटाला उजागर हुआ है, जहाँ नियमों को ताक पर रखकर अपनों को रेवड़ियों की तरह फ्लैट बांट दिए गए।
28 में से 12 फ्लैट एक ही परिवार की झोली में
सामने आई जानकारी के मुताबिक, मायानगर आवास समिति के विनायक अपार्टमेंट के बी टावर में फ्लैटों के आवंटन को लेकर बड़ा खेल किया गया। यहाँ कुल 28 फ्लैटों में से हैरान करने वाली बात यह रही कि उनमें से 12 फ्लैट सीधे तौर पर एक ही परिवार को आवंटित कर दिए गए। यह परिवार कोई आम परिवार नहीं था, बल्कि समिति के तत्कालीन सभापति फूलकुंवर और सचिव अजय ने अपने ही सगे-सम्बन्धियों और परिजनों को ये सारे फ्लैट सौंप दिए।
जांच रिपोर्ट में हुआ बड़ा खुलासा
इस पूरे मामले की भनक लगने के बाद जब प्रशासनिक स्तर पर इसकी गहराई से छानबीन की गई, तो जांच रिपोर्ट में चौंकाने वाला खुलासा हुआ। समिति के शीर्ष पदों पर बैठे जिम्मेदार लोगों ने अपने अधिकारों का दुरुपयोग करते हुए भाई-भतीजावाद की सारी हदें पार कर दीं और अपने परिवार के सदस्यों के नाम पर फर्जी तरीके से फ्लैट दर्ज करा लिए। इस बहुचर्चित घोटाले के पुख्ता सबूत मिलने के बाद सिटी मजिस्ट्रेट ने इससे जुड़े सभी अहम दस्तावेज और जांच रिपोर्ट जिलाधिकारी (DM) को सौंप दी है।
प्रशासनिक हलचल और आगे की कार्रवाई
इस खुलासे के बाद मुरादाबाद के प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मच गया है। पीड़ितों और आम नागरिकों में इस बात को लेकर भारी आक्रोश है कि जिन लोगों पर गरीबों और जरूरतमंदों को आवास उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी थी, उन्होंने ही अपने पद का गलत इस्तेमाल कर सरकारी और सहकारिता नियमों की धज्जियां उड़ा दीं। अब देखना यह होगा कि डीएम स्तर से इस मामले में तत्कालीन सभापति और सचिव के खिलाफ क्या और कितनी कड़ी कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जाती है।



