पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजों ने पूरे देश की राजनीति को हिलाकर रख दिया है। 4 मई को आए परिणामों में भारतीय जनता पार्टी ने 207 सीटों के साथ प्रचंड बहुमत हासिल कर सत्ता की चाबियां अपने हाथ में ले ली हैं। अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि बंगाल की कमान किसके हाथों में होगी। बीजेपी की परंपरा के अनुसार मुख्यमंत्री का नाम अब तक गुप्त रखा गया है, लेकिन सूत्रों की मानें तो बंगाल के अगले ‘निजाम’ का नाम लगभग तय हो चुका है।
सुवेंदु अधिकारी के नाम पर मुहर!
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, पार्टी का शीर्ष नेतृत्व ‘जाइंट किलर’ सुवेंदु अधिकारी को राज्य की जिम्मेदारी सौंपने के पक्ष में है। सुवेंदु ने न केवल 2021 में नंदीग्राम में ममता बनर्जी को हराया था, बल्कि इस बार भवानीपुर के मैदान में भी मुख्यमंत्री को 15,000 से अधिक वोटों से मात देकर अपनी राजनीतिक ताकत का लोहा मनवाया है। बीजेपी के एक वरिष्ठ सूत्र ने दावा किया है कि सुवेंदु का प्रशासनिक अनुभव और तृणमूल की कार्यप्रणाली की गहरी समझ उन्हें मुख्यमंत्री पद के लिए सबसे योग्य उम्मीदवार बनाती है।
अमित शाह का कोलकाता दौरा और पर्यवेक्षकों की नियुक्ति
आज यानी 6 मई को गृह मंत्री अमित शाह कोलकाता पहुँच सकते हैं। उनके साथ सह-पर्यवेक्षक के रूप में ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन मांझी भी मौजूद रहेंगे। नवनिर्वाचित विधायकों के साथ औपचारिक बैठक के बाद सुवेंदु अधिकारी के नाम की आधिकारिक घोषणा की जा सकती है। प्रदेश अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य ने संकेत दिए हैं कि 9 मई को गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर की जयंती के पावन अवसर पर नई सरकार का शपथ ग्रहण समारोह आयोजित किया जाएगा।
ममता बनर्जी का ‘विद्रोही’ रुख: इस्तीफा देने से इनकार
दूसरी ओर, चुनावी मैदान में महज 80 सीटों पर सिमट जाने के बावजूद ममता बनर्जी का रुख कड़ा बना हुआ है। उन्होंने स्पष्ट कर दिया है कि वे मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा नहीं देंगी। पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने चुनाव आयोग पर ‘साजिश’ का आरोप लगाते हुए कहा कि उनकी हार जनादेश नहीं, बल्कि ‘वोटों की लूट’ है। ममता ने दावा किया कि लगभग 100 सीटों पर परिणाम बदले गए हैं। हालांकि, संवैधानिक जानकारों का कहना है कि बहुमत खोने के बाद इस्तीफा न देने की स्थिति में राज्यपाल के पास सरकार को बर्खास्त करने का अधिकार सुरक्षित है।
संघर्ष और अनुभव की जीत
सुवेंदु अधिकारी का ग्राफ तेजी से बढ़ा है। ममता सरकार में कई महत्वपूर्ण मंत्रालय संभाल चुके सुवेंदु अब बीजेपी के चेहरे के रूप में बंगाल की नई पहचान बनने की ओर अग्रसर हैं। अब देखना यह है कि राजभवन और लोक भवन के बीच यह खींचतान क्या नया मोड़ लेती है।



