लखनऊ: उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने प्रदेश में नए मंत्रियों के विभागों के बंटवारे में हो रही देरी को लेकर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की सरकार पर जोरदार हमला बोला है। अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर एक पोस्ट के जरिए आरोप लगाया कि यह देरी प्रशासनिक नहीं, बल्कि ‘कमीशन-कमाई’ के बंटवारे को लेकर मचे घमासान का परिणाम है।
“डबल इंजन के टकराव में मंत्री बने दर्शक”
अखिलेश यादव ने अपनी पोस्ट में चुटकी लेते हुए लिखा कि उत्तर प्रदेश में मंत्रियों के चयन के बाद अब क्या उनके विभागों की ‘पर्ची’ भी दिल्ली (ऊपर) से आएगी? उन्होंने तंज कसा कि मंत्रालयों के बंटवारे की असली वजह भ्रष्टाचार की कमाई का बंदरबांट है, जिसके कारण ‘डबल इंजन’ आपस में टकरा रहे हैं।
सपा प्रमुख ने नए मंत्रियों की स्थिति पर सहानुभूति जताते हुए कहा कि लंबे इंतजार के बाद जो नेता मंत्री बने हैं, वे फिलहाल ‘दर्शक दीर्घा’ में बैठकर गेंद को इधर-उधर जाते हुए देखने को मजबूर हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा का ‘डबल इंजन’ मॉडल बाकी सभी मंत्रियों की शक्तियों को शून्य (डब्बा) कर देता है।
जनता रखेगी ‘निगाह-निगरानी’, जुटेंगे वीडियो सबूत
भ्रष्टाचार के मुद्दे पर सरकार को घेरते हुए अखिलेश ने कहा कि यूपी की जनता ने अब यह ठान लिया है कि नए मंत्रियों को जो भी विभाग मिलेगा, उस पर कड़ी निगरानी रखी जाएगी। उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में लिखा-
“इन नए-नवेले मंत्रियों को खजाना नहीं भरने दिया जाएगा। जनता अब कागजी प्रमाणों के साथ-साथ ऑडियो-वीडियो सबूत भी इकट्ठा करेगी ताकि भाजपाइयों की कलई खोली जा सके।”
भ्रष्टाचार के खिलाफ ‘सिटिजन जर्नलिज्म’ का आह्वान
अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि भाजपा ने भ्रष्टाचार रोकने वाले सभी सरकारी संस्थानों को बर्बाद कर दिया है। ऐसे में अब जनता को केवल सोशल मीडिया और ‘सिटिजन जर्नलिज्म’ से ही न्याय की उम्मीद है। उन्होंने कहा कि जनता अब खुद जागरूक होकर अपने टैक्स के पैसों की लूट को रोकेगी।
“सत्ता में आखिरी बार है भाजपा”
अपने हमले के अंत में सपा प्रमुख ने इसे भाजपा की अंतिम पारी करार देते हुए कहा कि भाजपा सरकार जानती है कि वे आखिरी बार सत्ता में हैं, इसीलिए वे “दसों हाथों से पैसा बटोरना” चाहते हैं। हालांकि, उन्होंने दावा किया कि जागरूक जनता उनके इन ‘गंदे मंसूबों’ को कभी कामयाब नहीं होने देगी।
अखिलेश यादव के इस बयान के बाद उत्तर प्रदेश की सियासत में हलचल तेज हो गई है। विपक्षी दल जहां इसे सरकार की आंतरिक कलह बता रहे हैं, वहीं भाजपा की ओर से अभी इस पर आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार है। देखना यह होगा कि विभागों के बंटवारे की सूची कब तक सामने आती है।












