सोने की चमक ने भारत के विदेशी मुद्रा भंडार को नई ऊंचाई पर पहुँचा दिया है। RBI की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, भारत के पास अब 880.5 टन सरकारी सोना जमा है, जिसकी बाजार वैल्यू बढ़कर 115.8 अरब डॉलर (लगभग 9.6 लाख करोड़ रुपये से अधिक) हो गई है। यह आंकड़ा पिछले दो वर्षों में दोगुना हुआ है, जिसका मुख्य कारण सोने की कीमतों में वैश्विक स्तर पर आई ऐतिहासिक तेजी है।
कीमतों में उछाल और RBI की डाइवर्सिफिकेशन नीति
सोने की वैश्विक कीमत 2024 में $2,000 प्रति औंस से बढ़कर 2026 में $4,000 प्रति औंस के पार पहुँच गई है। इसी को देखते हुए RBI ने अपनी रिजर्व रणनीति को बदलते हुए सोने को प्राथमिकता दी है। 2015 में भारत का रिजर्व 557.8 टन था, जो अब 880.5 टन हो चुका है। यह पिछले एक दशक में लगभग 58 प्रतिशत की उल्लेखनीय वृद्धि है।
क्यों जमा कर रहा है RBI इतना सोना?
दुनिया भर के सेंट्रल बैंक, खासकर उभरती अर्थव्यवस्थाएं, डॉलर पर निर्भरता कम करने के लिए सोने का रुख कर रहे हैं:
- भू-राजनीतिक अनिश्चितता: रूस-यूक्रेन संघर्ष के बाद से वैश्विक अनिश्चितता बढ़ी है, जिससे सुरक्षित निवेश के रूप में सोने की मांग बढ़ी है।
- करेंसी में उतार-चढ़ाव: डॉलर और अन्य विदेशी मुद्राओं में आने वाली अस्थिरता से बचने के लिए सोना एक ‘हेज’ (बचाव) की तरह काम करता है।
- वित्तीय प्रतिबंधों का डर: विदेशी मुद्रा भंडार के रूप में सोना सुरक्षित है क्योंकि इस पर किसी देश का प्रतिबंध लागू नहीं हो सकता।
क्या है वर्तमान स्थिति?
पिछले छह महीनों में भारत के कुल विदेशी मुद्रा भंडार में सोने की हिस्सेदारी 12 प्रतिशत से बढ़कर 17 प्रतिशत हो गई है। यह स्पष्ट संकेत है कि RBI डॉलर के अलावा एक मजबूत और सुरक्षित एसेट क्लास को अपने रिजर्व में प्रमुखता दे रहा है।














