बिहार में राज्यसभा चुनाव को लेकर सियासत और उठापटक का नजारा देखने को मिल रहा है। आज की वोटिंग में अब तक 239 विधायकों ने मतदान किया है। इस दौरान NDA खेमे के सभी विधायक मतदान कर चुके हैं। विपक्षी खेमे से अभी तक चार विधायक वोटिंग में शामिल नहीं हुए हैं, जिनमें कांग्रेस के तीन और RJD के एक विधायक शामिल हैं। यदि ये चार विधायक शाम 4 बजे तक मतदान करने नहीं पहुंचे तो NDA की सभी पांच सीटों पर जीत सुनिश्चित हो जाएगी।
राज्यसभा चुनाव में सियासत के खेल ने इस बार नया मोड़ ले लिया है। खबर है कि जीतन राम मांझी की पार्टी की दो महिला विधायक नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव के साथ देखी गईं। ये दोनों विधायक महागठबंधन के उम्मीदवार अमरेंद्र धारी और AIMIM के विधायकों के साथ वोटिंग के लिए जाते हुए दिखाई दीं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ये दोनों विधायक RJD के समर्थन में वोट कर सकती हैं, जिससे महागठबंधन की उम्मीदें बढ़ गई हैं।
गायब विधायक इस चुनाव में सियासी तनाव का मुख्य कारण बने हुए हैं। कांग्रेस के तीन विधायक अब तक वोटिंग से अनुपस्थित हैं और उनका मोबाइल फोन भी बंद है। गायब विधायकों में शामिल हैं – वाल्मीकि नगर से सुरेंद्र कुशवाहा, फारबिसगंज से मनोज विश्वास, मनिहारी से मनोहर सिंह और ढाका से RJD के फैजल रहमान। उनकी अनुपस्थिति ने राज्यसभा चुनाव के नतीजों पर असर डालने की अटकलें तेज कर दी हैं।
बिहार और हरियाणा में राज्यसभा चुनाव के दौरान सियासी उठापटक सामान्य से अधिक है। बिहार में कुल पांच सीटों के लिए मतदान हो रहा है और इसमें कुल छह उम्मीदवार मैदान में हैं। NDA के पास वर्तमान में 202 विधायकों की ताकत है, जबकि महागठबंधन के पास केवल 35 विधायक हैं। संख्या बल के आधार पर स्पष्ट है कि NDA को चार सीटों पर आसानी से जीत मिल सकती है, लेकिन पांचवीं सीट के लिए पूरा पेंच फंसा हुआ है। NDA को पांचवीं सीट जीतने के लिए महागठबंधन के कम से कम तीन विधायकों का समर्थन चाहिए।
जेल से वोट डालने के मामले ने भी चर्चा बढ़ा दी है। JDU विधायक अनंत कुमार सिंह मतदान के लिए एंबुलेंस से बिहार विधानसभा पहुंचे। इस दौरान उन्होंने पांचों सीटों पर जीत का दावा किया और साथ ही निशांत कुमार को बिहार का मुख्यमंत्री बनाने की इच्छा जाहिर की। मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा कि यदि नीतीश कुमार भविष्य में मुख्यमंत्री नहीं बने तो वे खुद किसी चुनाव में नहीं उतरेंगे।
विपक्ष ने भी अपनी उम्मीदें बरकरार रखी हैं। RJD नेता तेजस्वी यादव ने कहा कि उनके आंकड़े मजबूत हैं और AIMIM और बसपा के साथियों ने उनका समर्थन किया है। तेजस्वी का दावा है कि उनके पास 41 सीटों तक की संभावना है, जिससे विपक्ष के लिए कम से कम एक सीट पर जीत पक्की हो सकती है। अब यह देखना बाकी है कि तेजस्वी का दावा कितना सही साबित होता है और पांचों सीटों के लिए सियासत का खेल किस दिशा में जाता है।
इस चुनाव में राजनीतिक रणनीतियों और गायब विधायकों के कारण चुनावी नतीजे पूरी तरह अनिश्चित बने हुए हैं। बीजेपी और JDU की गठबंधन की ताकत के बावजूद विपक्ष के अचानक समर्थन और अप्रत्याशित घटनाओं ने बिहार राज्यसभा चुनाव को और भी दिलचस्प बना दिया है। इस समय पूरे राज्य की नजरें इस चुनाव और पांच सीटों के नतीजों पर टिकी हैं।














