नई दिल्ली: राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की कार्यप्रणाली के खिलाफ चल रहे विरोध प्रदर्शनों के बीच एक बेहद खौफनाक और शर्मनाक मोड़ सामने आया है। हिरासत में ली गई नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया (NSUI) की छात्रा-प्रदर्शनकारियों ने पुलिसिया बर्बरता, मारपीट और गंभीर शारीरिक प्रताड़ना के सनसनीखेज आरोप लगाए हैं। कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने खुद इन छात्राओं को मीडिया के सामने लाकर उनकी दर्दभरी दास्तान देश के सामने रखी।
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान जब छात्राएं अपनी आपबीती सुना रही थीं, तो माहौल गमगीन और गुस्से से भर गया। छात्राओं का दावा है कि प्रदर्शन के दौरान और थाने ले जाने के बाद उनके साथ पुलिस ने ऐसा व्यवहार किया जैसे वे कोई खूंखार अपराधी हों।
पेट के निचले हिस्से पर लात और प्राइवेट पार्ट पर हमला
प्रदर्शन में शामिल छात्रा ऋतु बराला ने रोते हुए पुलिस कर्मचारियों पर सीधे और बेहद गंभीर आरोप लगाए। ऋतु के मुताबिक, बस में बिठाने और थाने ले जाने के दौरान उन्हें बेदर्दी से घसीटा गया। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिसकर्मियों ने उनके पेट के निचले हिस्से पर लात मारी और उनके प्राइवेट पार्ट को भी निशाना बनाया। ऋतु ने बताया कि एक महिला पुलिसकर्मी (कांस्टेबल चंचल) ने उनका गला तक दबाने की कोशिश की। जब उन्होंने प्रताड़ना का विरोध किया, तो पुलिसकर्मियों ने ताना मारते हुए कहा कि “तुम्हारी वजह से हमारी नींद खराब हो रही है और हम सो नहीं पा रहे हैं।”
‘कमरा नंबर 107’ का खौफनाक सच
एक अन्य महिला NSUI कार्यकर्ता ने कनॉट प्लेस थाने के भीतर हुई कथित हैवानियत की कहानी सुनाई। छात्रा का दावा है कि उसे हिरासत में लेने के बाद थाने के कमरा नंबर 107 में ले जाया गया। वहां सादे कपड़ों में मौजूद कुछ महिला अधिकारियों और पुलिसकर्मियों ने बंद कमरे में उसके साथ लात-घूसों से मारपीट की। छात्रा ने अपने पैरों पर पड़े नीले निशानों को दिखाते हुए बताया कि पिटाई के कारण उसके शरीर के कई हिस्से काले और नीले पड़ चुके हैं।
कान में धंस गई बाली, डॉक्टरों को निकालनी पड़ी
पुलिसिया धक्का-मुक्की और घसीटे जाने की इस घटना में एक अन्य छात्रा के साथ ऐसा हादसा हुआ जिसने संवेदनहीनता की हदें पार कर दीं। छात्रा ने बताया कि घसीटते वक्त धक्का-मुक्की में उसकी कान की बाली कान के मांस के अंदर गहराई तक धंस गई। दर्द से कराहती छात्रा को बाद में डॉक्टरों के पास ले जाना पड़ा, जहां डॉक्टरों ने सर्जिकल प्रक्रिया के जरिए बाली को बाहर निकाला। इसके अलावा छात्राओं ने यह भी आरोप लगाया कि उनके मोबाइल फोन जबरन छीन लिए गए ताकि वे किसी को अपनी लोकेशन या स्थिति की जानकारी न दे सकें।
“सबूत संभालकर रखो, जब यह मुद्दा खत्म होगा तो पाई-पाई का हिसाब होगा” – राहुल गांधी
छात्राओं की खौफनाक दास्तान सुनने के बाद राहुल गांधी ने पुलिस प्रशासन और केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने प्रदर्शनकारी छात्रों का ढांढस बंधाते हुए कहा कि वे इस अन्याय के खिलाफ मजबूती से खड़े रहें और किसी भी कीमत पर डरें नहीं।
राहुल गांधी ने छात्राओं को सलाह दी कि वे अपने साथ हुई हर घटना, चोट के निशानों और पुलिसिया कार्रवाई के वीडियो व फोटो साक्ष्य के रूप में संभालकर रखें। उन्होंने कहा, “मैंने सभी छात्रों से कहा है कि वे वीडियो रिकॉर्ड रखें और सारे सबूत हमें भेजें। जब यह मुद्दा खत्म होगा, तो हम इन्हीं सबूतों के आधार पर अदालत से लेकर सड़क तक लड़ाई लड़ेंगे और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करेंगे। किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।”
छात्राओं द्वारा लगाए गए इन गंभीर और संगीन आरोपों ने दिल्ली पुलिस के रवैये और हिरासत में महिलाओं की सुरक्षा पर बहुत बड़े सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं। हालांकि, इन तमाम आरोपों और दावों पर फिलहाल दिल्ली पुलिस का आधिकारिक और विस्तृत पक्ष आना अभी बाकी है।



