रामपुर: उत्तर प्रदेश के रामपुर की विशेष एमपी-एमएलए कोर्ट में समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री आजम खान तथा उनके बेटे अब्दुल्ला आजम खान की मुश्किलें एक बार फिर बढ़ती नजर आ रही हैं। चर्चित पैन कार्ड धोखाधड़ी मामले में सजा बढ़ाने की मांग को लेकर चल रही कानूनी बहस बुधवार को पूरी हो गई। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। इस मामले में आगामी 23 मई 2026 को कोर्ट का बड़ा और निर्णायक फैसला आ सकता है।
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से पैरवी कर रहे अपर महाधिवक्ता ने आजम खान और अब्दुल्ला आजम की सजा को और बढ़ाने के पक्ष में अदालत के समक्ष कई महत्वपूर्ण कानूनी नजीरें और रूलिंग पेश कीं हैं। सरकार का तर्क है कि अपराध की गंभीरता को देखते हुए दी गई सजा नाकाफी है, इसलिए इसमें इजाफा किया जाना चाहिए।
क्या है पूरा मामला?
यह पूरा विवाद अब्दुल्ला आजम खान के दो अलग-अलग पैन कार्ड (PAN Card) बनवाने और उनमें जन्मतिथि की धोखाधड़ी से जुड़ा हुआ है।
इस मामले को लेकर साल 2019 में रामपुर के सिविल लाइंस थाने में एक आपराधिक मुकदमा दर्ज कराया गया था।
जांच के बाद कोर्ट में चार्जशीट दाखिल हुई और लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद 17 नवंबर 2023 को एमपी-एमएलए कोर्ट ने पिता-पुत्र को दोषी करार देते हुए 7-7 साल की जेल की सजा सुनाई थी।
फिलहाल दोनों नेता इस मामले में सजा काट रहे हैं, लेकिन शासन की ओर से इस सजा को अधिकतम सीमा तक बढ़ाने के लिए अपील दायर की गई थी। अब पूरी कानूनी बहस पूरी होने के बाद सबकी नजरें 23 मई को आने वाले फैसले पर टिकी हैं, जो आजम परिवार की सियासी और कानूनी दिशा तय करने में बेहद अहम साबित होगा।













