पाकिस्तान में एक बार फिर सिख तीर्थयात्रियों को भारत आने से रोकने का मामला सामने आया है। श्री हेमकुंड साहिब की तीर्थयात्रा के लिए भारत आने वाले 100 से ज्यादा पाकिस्तानी सिख श्रद्धालुओं को आखिरी वक्त पर फ्लाइट में सवार होने से रोक दिया गया। तीर्थयात्रियों का दावा है कि उनके पास पाकिस्तानी पासपोर्ट के साथ भारतीय वीजा भी था, इसके बावजूद पाकिस्तानी अधिकारियों ने उनसे NOC मांगा और उन्हें यात्रा करने की अनुमति नहीं दी।
दुबई के रास्ते भारत आने वाले थे श्रद्धालु
सिख तीर्थयात्रियों के मुताबिक, वे दुबई की फ्लाइट पकड़ने के लिए एयरपोर्ट पहुंचे थे। वहां से उन्हें आगे नई दिल्ली की यात्रा करनी थी। लेकिन एयरपोर्ट पर पाकिस्तानी अधिकारियों ने उनसे अनापत्ति प्रमाण पत्र यानी NOC की मांग की।
NOC नहीं होने की वजह से उन्हें फ्लाइट में सवार होने से रोक दिया गया। इसके चलते उनकी दुबई की फ्लाइट भी छूट गई।
तीर्थयात्री ने वीडियो में सुनाई आपबीती
एयरपोर्ट पर रोके गए एक सिख तीर्थयात्री ने वीडियो में अपनी नाराजगी जाहिर की। उन्होंने कहा कि उनके पाकिस्तानी पासपोर्ट पर भारत का वीजा लगा हुआ है, ऐसे में इमिग्रेशन अधिकारियों की ओर से सिविलियन से NOC मांगने का क्या अधिकार है।
तीर्थयात्री ने कहा कि NOC अपराधियों से मांगी जाती है और वे कोई सरकारी कर्मचारी नहीं हैं। उन्होंने इस कार्रवाई को पाकिस्तान का जुल्म बताते हुए अपनी नाराजगी जाहिर की।
104 श्रद्धालुओं को मिला था भारत का वीजा
जानकारी के मुताबिक, भारत ने 104 सिख श्रद्धालुओं को वीजा जारी किया था। वाघा-अटारी बॉर्डर बंद होने की वजह से इन श्रद्धालुओं ने दुबई के रास्ते हवाई यात्रा का महंगा विकल्प चुना था।
लेकिन एयरपोर्ट पर रोके जाने के कारण उनकी फ्लाइट छूट गई और उन्हें आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ा।
तीर्थयात्रियों ने की वाघा-अटारी बॉर्डर से प्रवेश की मांग
परेशान सिख श्रद्धालुओं ने पाकिस्तानी अधिकारियों पर जानबूझकर उन्हें रोकने का आरोप लगाया है। उन्होंने अपील की कि उन्हें वाघा-अटारी के जमीनी बॉर्डर के जरिए भारत में प्रवेश करने की अनुमति दी जाए, ताकि वे अपनी धार्मिक यात्रा पूरी कर सकें।
तीर्थयात्रियों का कहना है कि यह केवल यात्रा में रुकावट का मामला नहीं है, बल्कि लंबे समय से प्रतीक्षित धार्मिक तीर्थयात्रा में बाधा है।















