केंद्र सरकार ने भारत में आने और यहां से दूसरे देशों में जाने वाले लोगों के लिए पासपोर्ट और वीजा से जुड़े नियमों में बदलाव किया है। केंद्रीय गृह मंत्रालय की ओर से जारी नई अधिसूचना का असर अफगानिस्तान, बांग्लादेश और पाकिस्तान से आने वाले छह गैर-मुस्लिम समुदायों के लोगों पर पड़ेगा। इसके अलावा नेपाल और भूटान के रास्ते भारत आने-जाने वाले यात्रियों के लिए भी नियम सख्त किए गए हैं।
छह गैर-मुस्लिम समुदायों के लिए वीजा जरूरी
नई अधिसूचना के मुताबिक, अफगानिस्तान, बांग्लादेश और पाकिस्तान से आने वाले हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई समुदाय के लोगों को अब भारत में रहने के लिए उचित श्रेणी का वीजा लेना होगा।
यह नियम उन लोगों पर लागू होगा, जो धार्मिक उत्पीड़न या इसके डर के कारण 31 दिसंबर 2024 तक भारत आए थे। ऐसे लोगों के पास वैध यात्रा दस्तावेज नहीं थे या भारत आने के बाद उनके दस्तावेजों की वैधता समाप्त हो गई थी।
गृह मंत्रालय की ओर से बुधवार को जारी अधिसूचना में कहा गया है कि भारत में रहने के लिए अब इन लोगों को निर्धारित श्रेणी का वीजा लेना अनिवार्य होगा। इससे पहले सितंबर 2025 के आदेश के तहत इन छह समुदायों के लोगों को पासपोर्ट और वीजा की शर्तों से छूट दी गई थी।
नेपाल और भूटान के नागरिकों के लिए भी बदले नियम
भारत सरकार ने नेपाल और भूटान के नागरिकों की आवाजाही से जुड़े नियमों में भी बदलाव किया है। अब भारत, नेपाल और भूटान के नागरिकों को एक-दूसरे के देश में आने-जाने के लिए वीजा मैनुअल के तहत निर्धारित मान्य पहचान दस्तावेज दिखाने होंगे।
इसके अलावा अगर कोई भारतीय नागरिक नेपाल या भूटान के रास्ते किसी तीसरे देश की यात्रा करता है, तो उसके पास वैध पासपोर्ट होना जरूरी होगा। ऐसे यात्रियों को अब निर्धारित चेकपॉइंट्स से ही गुजरना होगा।
चीन और पाकिस्तान के रास्ते भारत आने पर भी सख्ती
नए नियमों के तहत नेपाल और भूटान के ऐसे नागरिक, जो चीन, पाकिस्तान, हांगकांग या मकाऊ के रास्ते भारत आ रहे हैं, उनके लिए वैध पासपोर्ट और वीजा दिखाना अनिवार्य होगा।
श्रीलंकाई तमिल और तिब्बती नागरिकों को छूट जारी
केंद्र सरकार ने देश में रह रहे श्रीलंकाई तमिल शरणार्थियों और तिब्बती नागरिकों के लिए पासपोर्ट और वीजा से जुड़ी कानूनी छूट जारी रखी है। नए बदलावों के बावजूद इन दोनों श्रेणियों को पहले से मिल रही छूट बरकरार रहेगी।















