कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयोग से जुड़े SIR विवाद को लेकर एक अहम प्रेस कॉन्फ्रेंस की। इस दौरान उन्होंने केंद्र सरकार और चुनाव आयोग पर बेहद तीखे हमले करते हुए देश के संविधान और चुनावी प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि देश में संविधान और लोकतंत्र के बुनियादी ढांचे पर सुनियोजित हमला हो रहा है, और लोकसभा व विधानसभा चुनावों में बड़े पैमाने पर “वोट चोरी” की गई है।
सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए राहुल गांधी ने कहा कि भारत की राजनीतिक परंपरा में हर सरकार के खिलाफ सत्ता विरोधी लहर देखने को मिलती है, लेकिन बीजेपी के मामले में यह लहर पूरी तरह गायब नजर आती है। उन्होंने इंदिरा गांधी का उदाहरण देते हुए कहा कि बांग्लादेश युद्ध जीतने के बाद भी दिग्गज नेता चुनाव हार गए थे, ऐसे में यह समझ से परे है कि हर जगह होने वाली एंटी-इनकंबेंसी बीजेपी के खिलाफ क्यों काम नहीं करती।
राहुल गांधी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर सीधा निशाना साधते हुए कहा कि उन्हें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह ने चुना था। उन्होंने दावा किया कि चुनाव आयोग के ही दो अन्य चुनाव आयुक्त यह कह रहे हैं कि ज्ञानेश कुमार वोटिंग सिस्टम को नुकसान पहुँचाने के जिम्मेदार हैं। राहुल ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री और गृह मंत्री ज्ञानेश कुमार का बचाव कर रहे हैं, जबकि उन्हें तुरंत अपने पद से इस्तीफा दे देना चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि चुनाव चोरी करने में मदद करने के गंभीर परिणाम भुगतने होंगे और इसके लिए जिम्मेदार लोगों को आज नहीं तो कल सजा जरूर मिलेगी।
नेता प्रतिपक्ष ने यह भी कहा कि जब वोट चुराकर सांसद संसद में पहुंचते हैं, तो उनके द्वारा बनाए गए सभी कानून स्वतः गैरकानूनी हो जाते हैं। यह केवल वोटों पर हमला नहीं, बल्कि देश के नागरिकों के अपने नेता चुनने के बुनियादी अधिकार पर सीधा प्रहार है। कांग्रेस पार्टी पिछले तीन सालों से लगातार यह कह रही है कि देश में निष्पक्ष चुनाव नहीं हो रहे हैं और वोट चोरी हो रही है। अब इस पूरे घटनाक्रम के बाद देश की सियासत एक बार फिर गरमा गई है, और विपक्षी दलों ने चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।



