उत्तर प्रदेश के गोला इलाके के डाड़ी गांव में दुर्गा पूजा के दौरान गाय के दूध से तैयार प्रसाद का सेवन करने वाले लोगों में रेबीज की आशंका से दहशत फैल गई है। ग्रामीणों के मुताबिक, जिस गाय का दूध प्रसाद बनाने में इस्तेमाल हुआ था, उसे कुत्ते ने काटा था। बाद में गाय की तबीयत बिगड़ने और उसकी मौत होने के बाद पशु चिकित्सक ने लक्षणों के आधार पर रेबीज की आशंका जताई। इसके बाद स्वास्थ्य विभाग ने गांव में टीकाकरण शिविर लगाकर लोगों को एंटी रेबीज टीका लगाया।
मंगलवार और बुधवार को आयोजित शिविर में कुल 450 लोगों का टीकाकरण किया गया। स्वास्थ्य विभाग ने संभावित संपर्क में आए लोगों से चिकित्सकीय सलाह लेने और टीके की निर्धारित खुराक समय पर पूरी कराने की अपील की है।
दुर्गा पूजा में बांटा गया था गाय के दूध से बना प्रसाद
डाड़ी चौराहे पर नवयुवक मंगल दल समिति की ओर से दुर्गा प्रतिमा स्थापित कर पूजा का आयोजन किया गया था। समिति के अध्यक्ष सुधांशु रंजन के अनुसार, सप्तमी के दिन गांव के एक व्यक्ति के घर से दूध मंगाकर प्रसाद तैयार किया गया था। यह दूध चौराहे की कुछ चाय की दुकानों तक भी पहुंचा था।
ग्रामीणों के मुताबिक, 19 अक्टूबर को गाय ने खाना-पीना छोड़ दिया और उसके मुंह से लार गिरने लगी। पशुपालक गाय को राजकीय पशु चिकित्सालय, डाड़ी ले गए। वहां पशु चिकित्सक डॉ. जियाउल सिद्दीकी ने लक्षणों के आधार पर रेबीज की आशंका जताई। उपचार के बावजूद गाय की मौत हो गई।
मंगलवार को ग्रामीणों ने गाय को जमीन में दफना दिया। गाय का पोस्टमार्टम नहीं कराया गया है। ऐसे में रेबीज संक्रमण की आशंका की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
गांव में शिविर लगाकर 450 लोगों का टीकाकरण
गाय की मौत और प्रसाद के सेवन से जुड़े मामले की जानकारी मिलने के बाद ग्रामीणों में चिंता बढ़ गई। समिति अध्यक्ष सुधांशु रंजन, ग्राम प्रधान आशा देवी और अन्य ग्रामीणों ने सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी), गोला को पत्र देकर टीकाकरण शिविर लगाने की मांग की।
इसके बाद स्वास्थ्य विभाग ने गांव में टीकाकरण अभियान चलाया।
- मंगलवार: 50 लोगों को एंटी रेबीज टीका लगाया गया।
- बुधवार: सुबह 10 बजे से शाम 3 बजे तक चले शिविर में 400 लोगों का टीकाकरण हुआ।
- कुल टीकाकरण: दो दिनों में 450 लोगों को टीका लगाया गया।
फार्मासिस्ट सिद्धार्थ सिंह के नेतृत्व में पहुंची टीम में सीएचओ राजेश यादव और फार्मासिस्ट अंकिता, प्रियंका व अरशद शामिल रहे।
स्वास्थ्य विभाग की अपील- निर्धारित खुराक समय पर पूरी कराएं
सीएचसी प्रभारी डॉ. अमरेंद्र ठाकुर ने संभावित संपर्क में आए लोगों से चिकित्सकीय सलाह लेने और एंटी रेबीज टीके की निर्धारित खुराक समय पर पूरी कराने की अपील की। उन्होंने कच्चा दूध पीने से बचने और दूध को अच्छी तरह उबालकर इस्तेमाल करने की सलाह भी दी।
स्वास्थ्य विभाग की ओर से लोगों को सतर्क रहने और किसी भी तरह की आशंका होने पर चिकित्सकीय सलाह लेने के लिए कहा गया है।
ग्रामीणों में डर, बोले- सभी संबंधित लोगों का टीकाकरण हो
डाड़ी गांव के निवासी पवन सिंह ने बताया कि उन्होंने दुर्गा पूजा के दौरान प्रसाद ग्रहण किया था। गाय में रेबीज की आशंका सामने आने के बाद लोग घबरा गए हैं। उन्होंने मांग की कि स्वास्थ्य विभाग सभी संबंधित लोगों का निर्धारित टीकाकरण पूरा कराए और किसी भी लक्षण की स्थिति में तत्काल उपचार उपलब्ध कराए।
वहीं, ग्रामीण राजेश गुप्ता ने बताया कि दुर्गा पूजा में माता का पट खुलने के बाद प्रसाद बांटा गया था। अगले दिन गाय की तबीयत बिगड़ने और उसकी मौत की सूचना मिलने पर उन्होंने शिविर में टीका लगवाया। उन्होंने कहा कि निर्धारित खुराक पूरी होने के बाद ही लोगों को राहत मिलेगी।
एसडीएम ने दिए टीकाकरण के निर्देश
गोला के एसडीएम मनीष कुमार ने बताया कि सीएचसी प्रभारी को टीकाकरण के लिए निर्देशित किया गया है। गांव में शिविर लगाकर लोगों को टीका लगाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जिन लोगों को भी संभावित संक्रमण के संपर्क में आने की आशंका है, वे टीकाकरण जरूर कराएं।
आवारा कुत्तों के टीकाकरण की सुविधा उपलब्ध नहीं
उप मुख्य पशु चिकित्साधिकारी, गोला डॉ. शिव प्रकाश मौर्य के मुताबिक, पालतू कुत्तों के टीकाकरण की व्यवस्था पशु चिकित्सालय में उपलब्ध है, लेकिन आवारा कुत्तों को पकड़ने और उनका टीकाकरण करने की सुविधा फिलहाल उपलब्ध नहीं है।
उन्होंने बताया कि डाड़ी गांव में गाय की मौत के मामले में कुत्ते के काटने की आशंका जताई गई है। पशुपालकों को सलाह दी गई है कि पशुओं में किसी भी तरह के असामान्य लक्षण दिखाई देने पर तत्काल गोला पशु चिकित्सालय में मौजूद डॉक्टर से संपर्क करें।
रेबीज की आशंका के बीच सावधानी जरूरी
डाड़ी गांव में गाय की मौत के बाद प्रसाद का सेवन करने वाले लोगों की चिंता बढ़ गई है। स्वास्थ्य विभाग ने संभावित संपर्क में आए लोगों का टीकाकरण शुरू कराया है। हालांकि, गाय में रेबीज की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, क्योंकि उसका पोस्टमार्टम नहीं कराया गया।
महत्वपूर्ण: रेबीज के संभावित संपर्क को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। किसी व्यक्ति को संक्रमित पशु की लार से संपर्क होने की आशंका हो, तो तुरंत चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए और डॉक्टर के निर्देशानुसार टीकाकरण की पूरी प्रक्रिया अपनानी चाहिए।













