राजधानी दिल्ली के सियासी गलियारों में उस वक्त हलचल और तेज हो गई जब नेता विपक्ष राहुल गांधी ने सरकार और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर तीखे सवाल दाग दिए। जनता की आवाजाही पर लगे पहरों और विरोध-प्रदर्शनों को रोकने की कोशिशों पर चिंता जताते हुए उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर खूबसूरत दिल्ली को एक जेल में तब्दील क्यों किया जा रहा है?
राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि बसों और ट्रेनों को रोककर आम नागरिकों को दिल्ली पहुंचने से बेवजह रोका जा रहा है। यहाँ तक कि राजघाट जैसी शांतिपूर्ण जगह पर भी जाने वालों के साथ सख्ती बरती जा रही है। उन्होंने कहा कि सरकार मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को बचाने की हर संभव कोशिश कर रही है, लेकिन सच्चाई को छुपाया नहीं जा सकता। अगर सरकार उन्हें बचाने की जिद्द पर अड़ी रही, तो वह खुद इस दलदल में फंस जाएगी।
प्रदर्शन के दौरान पुलिस की भूमिका पर बात करते हुए उन्होंने एक बेहद संवेदनशील पहलू उजागर किया। उन्होंने कहा कि ड्यूटी पर तैनात 50 फीसदी पुलिसकर्मी खुद अंदर से इस व्यवस्था से परेशान हैं और वे भी दबी जुबान में यही कहते हैं कि हम जो लड़ाई लड़ रहे हैं, वह सही है।
लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा के लिए अब लड़ाई को अदालत तक ले जाने का फैसला किया गया है। राहुल गांधी का स्पष्ट कहना है कि जनता की आवाज दबाने की हर कोशिश के खिलाफ वे सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे, क्योंकि लोकतंत्र में जनता को अपनी बात कहने से रोकना सबसे बड़ी भूल है।











