मुंबई: दिलजीत दोसांझ अभिनीत फिल्म ‘सतलुज’ अपनी रिलीज के साथ ही विवादों में घिर गई है। ZEE5 पर रिलीज होने के कुछ ही समय बाद इसे हटाए जाने ने फिल्म जगत में सेंसरशिप को लेकर एक नई बहस छेड़ दी है। इस विवाद के बीच प्रसिद्ध फिल्ममेकर अनुराग कश्यप ने अपनी प्रतिक्रिया देकर मामले को और चर्चा में ला दिया है।
अनुराग कश्यप का ‘क्यूरियोसिटी’ वाला रिएक्शन
अनुराग कश्यप ने सोशल मीडिया पर अपनी बात रखते हुए कहा कि किसी फिल्म को प्रतिबंधित करने या उसे प्लेटफॉर्म से हटाने से उसका महत्व खत्म नहीं होता, बल्कि दर्शकों की उत्सुकता और बढ़ जाती है। कश्यप ने कहा, “सच कहूं तो मैं पहले इस फिल्म को देखने की योजना नहीं बना रहा था, लेकिन अब इसे हटाने की जो प्रक्रिया अपनाई गई है, उसे देखते हुए मैं इसे जरूर देखना चाहता हूं।” उन्होंने इशारों-इशारों में यह संदेश दिया कि सेंसरशिप के ऐसे फैसले अक्सर विपरीत परिणाम देते हैं।
क्या है ‘सतलुज’ विवाद?
हनी त्रेहान द्वारा निर्देशित यह फिल्म मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालड़ा के जीवन पर आधारित है। फिल्म को सेंसर सर्टिफिकेशन के लिए पिछले 4 वर्षों से काफी मुश्किलों और कानूनी दांव-पेचों का सामना करना पड़ा था। रिपोर्ट्स के मुताबिक, सेंसर बोर्ड ने फिल्म में कई महत्वपूर्ण कट्स की मांग की थी, जिसके चलते इसकी रिलीज में लगातार देरी होती रही। अंततः 3 जुलाई को इसके डिजिटल प्रीमियर के बाद इसे प्लेटफॉर्म से हटा दिया गया।
फिल्मी हस्तियों में नाराजगी
फिल्म को हटाए जाने के बाद से ही मनोरंजन जगत में सेंसरशिप को लेकर नाराजगी है। कई फिल्मी हस्तियां मानवाधिकार कार्यकर्ता की कहानी को दिखाए जाने के अधिकार का समर्थन कर रही हैं। यह विवाद एक बार फिर कलात्मक अभिव्यक्ति और सरकारी सेंसरशिप के बीच की तनातनी को सुर्खियों में ले आया है।



