लखनऊ: उत्तर प्रदेश में मानसून की दस्तक से पहले खेतों को उपजाऊ बनाने का सपना देख रहे किसानों के साथ एक बार फिर बड़ा विश्वासघात हुआ है। प्रदेश में हरी खाद के लिए रामबाण माने जाने वाले ढैंचा बीज के वितरण में करोड़ों रुपये के घोटाले की बू आ रही है। आरोप है कि उत्तर प्रदेश बीज निगम और HIL कंपनी ने साठगांठ कर किसानों को बेहद घटिया और घुना हुआ बीज थमा दिया है।
अमरोहा और रामपुर में मचा हड़कंप
ताजा मामला प्रदेश के कई जिलों से सामने आया है, जहाँ सरकारी केंद्रों पर पहुंचे किसानों ने बीज की गुणवत्ता देखते ही हंगामा शुरू कर दिया। अमरोहा और रामपुर समेत कई जनपदों में किसानों ने बीज लेने से साफ इनकार कर दिया और खेप को वापस लौटा दिया है। किसानों का कहना है कि जो बीज उन्हें ‘हरी खाद’ के रूप में फसल को ताकत देने के लिए दिया गया, वह खुद ‘बीमार’ और कीड़ों का शिकार है।
40 हजार कुंटल का बड़ा ऑर्डर और कमीशन का खेल
सूत्रों के मुताबिक, HIL कंपनी को करीब 40 हजार कुंटल बीज सप्लाई करने का विशाल टेंडर मिला था। लेकिन मानक को ताक पर रखकर पूरे प्रदेश में करोड़ों रुपये की लूट की गई। सवाल यह उठता है कि जब बीज पूरी तरह से खराब और घुना हुआ था, तो गुणवत्ता जांच (Quality Check) की टीम ने इसे हरी झंडी कैसे दी?
मौन है प्रशासन, गुस्से में किसान
एक ओर प्रदेश के कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही खेती को लाभ का सौदा बनाने के दावे करते हैं, वहीं दूसरी ओर उनकी नाक के नीचे इतना बड़ा बीज घोटाला फल-फूल रहा है। किसानों का आरोप है कि इस धांधली पर विभाग ने आंखें मूंद ली हैं। अगर समय रहते उच्च स्तरीय जांच नहीं हुई, तो इस साल प्रदेश में हरी खाद का लक्ष्य कागजों तक ही सीमित रह जाएगा और अन्नदाता की कमर टूट जाएगी।












