नई दिल्ली: दुनिया भर में जारी युद्ध के हालातों और बिगड़ती वैश्विक अर्थव्यवस्था के बीच भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्र के नाम एक बेहद महत्वपूर्ण संदेश जारी किया है। पीएम मोदी ने स्पष्ट किया कि पिछले दो महीनों से भारत के पड़ोसी क्षेत्रों में चल रहे संघर्ष का असर अब पूरी दुनिया के साथ-साथ भारत पर भी गंभीर रूप से पड़ने लगा है। प्रधानमंत्री ने नागरिकों से इस संकट की घड़ी में ‘राष्ट्र प्रथम’ की भावना के साथ सहयोग करने का आह्वान किया है।

तेल संकट पर सरकार की रणनीति
प्रधानमंत्री ने देश को संबोधित करते हुए कहा कि भारत के पास विशाल तेल भंडार की कमी है और वैश्विक सप्लाई चेन बाधित होने से कच्चे तेल की कीमतें आसमान छू रही हैं। उन्होंने कहा कि सरकार अब तक वैश्विक दबाव का भार खुद उठा रही है ताकि आम जनता पर इसका सीधा बोझ न पड़े, लेकिन अब समय आ गया है कि हर नागरिक अपनी जिम्मेदारी समझे।

पीएम मोदी की 5 बड़ी अपीलें

  1. ईंधन की बचत करें, निजी वाहनों के बजाय मेट्रो, बस जैसे सार्वजनिक परिवहन और कारपूलिंग का अधिक से अधिक उपयोग करें।
  2. स्वदेशी पर्यटन पर विराम लगाए, अगले एक साल तक अपनी विदेश यात्राएं टाल दें और इसके बदले घरेलू पर्यटन (देखो अपना देश) को बढ़ावा दें।
  3. विदेशी मुद्रा का संरक्षण करें, अनावश्यक विदेशी वस्तुओं के उपभोग से बचें ताकि देश की विदेशी मुद्रा बचाई जा सके।
  4. सोना न खरीदने की बात कहीं, प्रधानमंत्री ने आग्रह किया है कि अर्थव्यवस्था की मजबूती के लिए नागरिक कम से कम एक साल तक सोना खरीदने से बचें।
  5. आत्मनिर्भर भारत में हर क्षेत्र में स्वदेशी उत्पादों को अपनाकर आत्मनिर्भर भारत के विजन को सफल बनाएं।

न्यायपालिका से भी सहयोग की उम्मीद
प्रधानमंत्री ने समाज के हर वर्ग के साथ-साथ न्यायपालिका से भी आग्रह किया है कि इस वैश्विक संकट के समय राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखते हुए समाधानकारी दृष्टिकोण अपनाएं। पीएम ने जोर देकर कहा कि सामूहिक प्रयास से ही भारत इस कठिन समय से सफलतापूर्वक बाहर निकल पाएगा।

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