Desk : श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के पावन अवसर पर देश के विभिन्न हिस्सों में भव्य धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। इसी कड़ी में राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के द्वारका स्थित प्रसिद्ध इस्कॉन मंदिर में भी श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी और जन्माष्टमी का पर्व पूरी धूमधाम से मनाया गया। इस खास मौके पर मंदिर परिसर में आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रम ने उत्सव की रौनक को चार चांद लगा दिए। जानी-मानी कथक डांसर डॉ. यास्मीन सिंह और उनके ग्रुप के कलाकारों ने अपनी मनमोहक प्रस्तुति से पूरे मंदिर परिसर में समां बांध दिया, जिसे देखकर वहां मौजूद दर्शक झूम उठे।
#WATCH | Delhi: Renowned classical dancer Dr Yasmin Singh says, “We are overjoyed to have presented our dance performance at the feet of Shri Krishna. We feel truly blissful; an artist could not ask for a better opportunity to perform than this, where the audience is so deeply… pic.twitter.com/BPrR5nP6hA
— ANI (@ANI) September 4, 2026
जन्माष्टमी पर प्रस्तुति मेरे लिए सौभाग्य की बात- डॉ. यास्मीन सिंह
प्रसिद्ध क्लासिकल डांसर डॉ. यास्मीन सिंह ने कहा, “मैं मध्य प्रदेश से आई हूं और मेरे साथी कलाकार देश के विभिन्न हिस्सों से आए हैं, जिन्होंने मेरे साथ कथक नृत्य में ताल और लय के साथ प्रस्तुति दी. मैं जन्माष्टमी के अवसर पर प्रस्तुति देकर खुद को सौभाग्यशाली महसूस कर रही हूं. ये अवसर बहुत ही कम लोगों को जीवन में प्राप्त होता है. प्रभु के श्रीचरणों में हमलोग नृत्य के फूलों को अर्पित करने आए हैं तो ये हमारी टीम के लिए बहुत ही भाग्य की बात है. हमलोग बहुत ही प्रसन्न हैं.”
दर्शकों ने भावपूर्ण तरीके से कार्यक्रम देखा- डॉ. यास्मीन सिंह
न्यूज एजेंसी एएनआई से बातचीत में कथक डांसर डॉ. यास्मीन सिंह ने दर्शकों की भी जमकर तारीफ की. उन्होंने कहा, ”दर्शकगण जो यहां पर उपस्थित थे, उन्होंने बहुत ही भावपूर्ण तरीके से और श्रद्धा के साथ हमारा कार्यक्रम देखा. ऐसा लग रहा था कि वो हमारे कार्यक्रम के साथ पूरी तरह से कनेक्टेड थे. सबसे बड़ी बात है कि दर्शक जो हैं वो कथक को समझ रहे थे. हमारे नृत्य की भाषा समझ रहे थे तो उनका पूरा सहयोग हमें प्राप्त था, इसलिए हम इतना बड़ा कार्यक्रम इतनी सफलतापूर्वक कर पाए.
भगवान श्रीकृष्ण ही हमारे इष्ट देवता- डॉ. यास्मीन सिंह
उन्होंने आगे कहा, ”भगवान श्रीकृष्ण ही हमारे इष्ट देवता हैं क्योंकि ता-ता थैया भगवान श्रीकृष्ण ने ही शुरू किया था. जब उन्होंने कालिया नाग का दमन किया था तो उनके फन पर खड़े होकर उन्होंने ता-ता थैया किया था. ये हमें श्रीकृष्ण से ही प्राप्त हुआ है. हम उन्हें ही अपने नृत्य में देखते हैं और इसके माध्यम से हम उनकी प्रार्थना और अराधना करते हैं.”















