देश में पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव संपन्न होते ही महंगाई ने अपना रंग दिखाना शुरू कर दिया है। आम जनता के बजट पर कड़ा प्रहार करते हुए केंद्र सरकार ने कमर्शियल एलपीजी (LPG) सिलेंडर की कीमतों में भारी इजाफा किया है। आज से 19 किलोग्राम वाले कमर्शियल गैस सिलेंडर के दाम में सीधे 993 रुपये की बढ़ोतरी कर दी गई है।
अखिलेश यादव का तीखा पलटवार
सिलेंडर के दामों में हुई इस बेतहाशा वृद्धि पर समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने सरकार को आड़े हाथों लिया है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफार्म ‘एक्स’ (X) पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि जब सिलेंडर महंगा होता है, तो असल में गरीब की थाली से रोटी महंगी हो जाती है। उन्होंने तंज कसते हुए लिखा, “यह दर्द वही समझ सकता है जो खुद खरीदकर खाता है, वो नहीं जो दूसरों की थाली से चुराता है।”
अखिलेश यादव ने 993 रुपये की वृद्धि पर कटाक्ष करते हुए कहा कि भाजपा वालों को अगर महंगा ही करना था तो सीधे 1000 रुपये बढ़ा देते, 7 रुपये कम रखकर वे किस पर एहसान कर रहे हैं? उन्होंने सवाल उठाया कि भाजपा आखिर महंगाई, बेरोजगारी और मंदी जैसे गंभीर मुद्दों पर अपनी चुप्पी कब तोड़ेगी? चुनाव के तुरंत बाद मिले इस झटके से जनता के बीच भारी आक्रोश देखा जा रहा है।
दिल्ली में कीमतें 3 हजार के पार
इस ताजा बढ़ोतरी के बाद देश की राजधानी दिल्ली में अब कमर्शियल सिलेंडर की कीमत बढ़कर 3,071.50 रुपये हो गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि कमर्शियल गैस महंगी होने का सीधा असर बाहर खाना खाने और रेस्तरां की कीमतों पर पड़ेगा, जिससे अंततः आम आदमी की जेब ही ढीली होगी।
इस साल तीसरी बार बढ़े दाम
साल 2026 में यह लगातार तीसरी बार है जब कमर्शियल गैस के दाम बढ़ाए गए हैं। इससे पहले 7 मार्च को ₹144 और 1 अप्रैल को ₹200 की वृद्धि हुई थी। लेकिन इस बार की ₹993 की उछाल ने होटल और रेस्टोरेंट मालिकों की चिंता बढ़ा दी है।
घरेलू सिलेंडर के दाम स्थिर
आम जनता के लिए अच्छी खबर यह है कि रसोई गैस की कीमतों को स्थिर रखा गया है। दिल्ली में यह ₹913 पर बरकरार है। विभिन्न शहरों में रेट्स इस प्रकार हैं:
क्यों बढ़ रही हैं कीमतें?
कीमतों में इस बेतहाशा वृद्धि के पीछे वैश्विक भू-राजनीतिक कारण हैं:
- होर्मुज स्ट्रेट की नाकेबंदी: मिडिल ईस्ट में ईरान और इजरायल के बीच तनाव के कारण ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ (Strait of Hormuz) में आपूर्ति बाधित हुई है।
- आयात पर निर्भरता: भारत अपनी जरूरत का लगभग 60% LPG और 85-90% कच्चा तेल पश्चिम एशियाई देशों से आयात करता है। आपूर्ति में रुकावट के कारण लागत बढ़ गई है।
- सप्लाई में कटौती: औद्योगिक क्षेत्रों के लिए गैस की आपूर्ति में कटौती की गई है, जिसका सीधा असर कीमतों और उपलब्धता पर पड़ रहा है।
- भारत फिलहाल रूस से तेल मंगाकर आपूर्ति को संतुलित करने की कोशिश कर रहा है, लेकिन वैश्विक बाजार में अस्थिरता का असर कीमतों पर साफ दिख रहा है।












